वर्ष 2012-13 की आपदा ने असी गंगा घाटी को जो जख्म दिए हैं, शासन-प्रशासन उन्हें भरने की पहल भी नहीं कर रहा है। स्थिति यह है कि यहां के गांवों में जाने के लिए न तो रास्ते हैं और न ही पानी, बिजली, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं।
असी गंगा घाटी के केलसू पट्टी के सात गांव के लोगों को जीवन कठिनायों से भरा है। अगोड़ा के प्रधान चंद्र लाल बताते हैं कि कई बार रास्ते को ठीक कराने के लिए शासन-प्रशासन से लोग मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई सुध नहीं ले रहा है।
नतीजन ग्रामीण भंकोली से होते हुए तीन किमी का अतिरिक्त सफर तय करने को मजबूर हैं। गांव की पेयजल लाइन भी ध्वस्त पड़ी हुई थी, जिसको विभाग ने फिलहाल रबड़ से टेप कर चालू किया है।
दंदालका, नौगांव, गजोली, भंकोली आदि गांवों में भी हालात कमोबेश ऐसे ही खराब हैं। दंदालका गांव की संपर्क पुलिया क्षतिग्रस्त है। नौगांव व गजोली को जोड़ने वाली संपर्क पुलिया भी एक तरफ से क्षतिग्रस्त पड़ी है। संगमचट्टी सड़क भी जगह-जगह से उबड़-खाबड़ व क्षतिग्रस्त पड़ी है।
गजोली में बिहारी लाल का मकान क्षतिग्रस्त है, तो अगोड़ा गांव में घनश्याम, सूरजमणी, जगदेव, चंद्र लाल के मकानों में दरारें पड़ने से खतरे की जद में है। केलसू क्षेत्र के अगोड़ा, नौगांव, गजोली, दंदालका समेत सात गांव प्रशासन ने संवेदनशीलता की सूची में चिह्नित किए हैं।
संगमचट्टी-आगोड़ा पैदल मार्ग का सर्वे कर मरम्मत को इस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। जल्द ही मार्ग को दुरुस्त कर लिया जाएगा।
-अशोक कुमार पांडेय, एडीएम
केलसू क्षेत्र के सात गांव आपदा की संवेदनशील सूची में चिह्नित किए गए हैं। जियोलॉजिकल सर्वे के बाद ही पता लग सकेगा कि किन गांवों का विस्थापन होना है।
देवेंद्र पटवाल, आपदा प्रबंधन अधिकारी