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एनजीटी की बंदिश बनी गंगा की स्वच्छता में रोड़ा

Thu, 30 Mar 2017 09:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
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गंगोत्री एवं उत्तरकाशी में सीवर लाइन और सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के डिजायन में शुरूआती चूक और अब एनजीटी की बंदिश भागीरथी गंगा की स्वच्छता में आड़े आ रही है। पुराने डिजायन में तटवर्ती हिस्सों, पुराने आश्रम, होटल और घरों की सीवर लाइन को टेप न करने से यह स्थिति उत्पन्न होने वाली है।
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नमामि गंगे के अंतर्गत भागीरथी घाटी के विभिन्न विभागों को घाट तथा गंगा की स्वच्छता बनाए रखने के लिए करोड़ों का बजट दिया गया है। अकेले सिंचाई विभाग ने डुंडा जड़ी ढुमका से लेकर गंगोत्री तक 22 घाटों के निर्माण के लिए 64 करोड़ की योजना तैयार की है।

गंगोत्री में सीवर लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लान के लिए पहले गंगा एक्शन प्लान तथा बाद में नदी संरक्षण योजना के तहत 10.48 करोड़ का बजट दे दिया गया था। अब नमामि गंगे से योजना के अधूरे निर्माण पर 45 लाख खर्च किए गए।
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नगर में भी पुरानी सीवर लाइन व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने के लिए नमामि गंगे से दस करोड़ का बजट दिया गया। बावजूद इसके आश्रम, होटल व घरों की गंदगी को सीवर लाइन से नहीं जोड़ा गया। नमामि गंगे प्रोजेक्ट की डीपीआर दिल्ली से ही वेपकॉस की ओर से राज्य सरकार के विभागों के सर्वेक्षण व आंकड़ों पर तैयार किया जाना भी स्वच्छता में बाधक है।

गंगोत्री में भागीरथी शिला से होकर सीवर लाइन ले जाने और गौरीकुंड के ऊपर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने से तीर्थपुरोहितों में नाराजगी है। नमामि गंगे अभियान के उत्तराखंड प्रमुख हरीश सेमवाल भी मानते हैं कि गंगोत्री से लेकर नीचे सभी आबादी वाले क्षेत्रों में बायोडाइजेस्टर टॉयलेट कूड़ा निस्तारण के लिए योजना बननी भी जरूरी है। एनजीटी के मानकों के मुताबिक नदी से किनारे किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता।

आपदा में गंगोत्री की क्षतिग्रस्त सीवर लाइन को 45 लाख के बजट से ठीक कर दिया गया है। उत्तरकाशी सीवर लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट को नमामि गंगे से मिले दस करोड़ के बजट से अपग्रेेड करने का काम शुरू किया जा रहा है। गंगोत्री तथा उत्तरकाशी में नदी किनारे छूटे कुछ हिस्सों में सीवर लाइन निर्माण में एनजीटी की बंदिश आड़े आ रही है।
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सुरेश पाल, ईई, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, जल निगम उत्तरकाशी।
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