एक वर्ष पूर्व मॉडल स्कूल के लिए चयनित राइंका सिर्फ नाम का मॉडल स्कूल बन कर रह गया है। यहां एक वर्ष बाद भी विद्यालय को वह सुविधाएं नहीं मिल पाई, जो मॉडल स्कूल को मिलनी चाहिए थी। स्थिति यह है कि मॉडल स्कूल में अध्यापकों का टोटा बना है।
प्रवक्ता के स्वीकृत नौ पदों में से एक (इतिहास) और एलटी के 10 पदों में से तीन (विज्ञान, कला, हिंदी,) विषय के तीन पद खाली पड़े हैं। स्कूल में तैनात अतिथि शिक्षक भी पिछले एक माह से हड़ताल पर हैं। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यालय में प्री बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी है और बोर्ड परीक्षाओं के लिए ढाई माह का समय शेष रह गया है।
क्षेत्र के दो दर्जन से भी अधिक गांवों के 550 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यालय में सफाई कर्मचारी तक नहीं है। सफाई व्यवस्था के लिए बच्चों से प्रति माह पांच रुपये अतिरिक्त फीस लेकर सफाई कर्मचारी की व्यवस्था की गई है। पिछले तीन दशक से इंटर की कक्षाएं हाईस्कूल के भवन में चल रही हैं।
इंटरमीडिएट की विज्ञान विषयों के लिए लैब की भी उचित व्यवस्था नहीं है। प्रभारी खंड शिक्षाधिकारी आरवी सिंह का कहना है कि अतिथि शिक्षकों के हड़ताल पर जाने से पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है। मुख्य शिक्षाधिकारी जगमोहन सोनी का कहना है कि जनपद के मॉडल विद्यालयों में प्रवक्ता के खाली पदों पर शीघ्र व्यवस्था की जा रही है।