जलवायु विविधता के चलते हर मौसम में सब्जी उत्पादन की संभावना और जिले में अलग से आलू एवं शाक भाजी विकास विभाग की मौजूदगी के बावजूद रोजाना मैदानी मंडियों से छह ट्रक सब्जी पहुंच रही है।
बरसाती सब्जियों के अलावा जिले के विभिन्न जलवायु वाले क्षेत्रों में आलू, टमाटर, राई, मूली, पालक, चने का साग, फ्रेंचबीन, भिंडी, मटर, कद्दू, खीरा, बंदगोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, करेला, लौकी, बैंगन, शिमला मिर्च, धनिया आदि सब्जियों के उत्पादन की संभावनाएं हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर प्रोत्साहन नहीं मिलने से कुछ स्थानीय किसान ही कुल खपत का महज दस फीसदी उत्पादन कर पा रहे हैं। उत्तरकाशी के सब्जी बाजार में रोजाना छह ट्रक सब्जी नजीबाबाद, देहरादून आदि मैदानी मंडियों से पहुंच रही है।
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो भागीरथी घाटी के भटवाड़ी, डुंडा और चिन्यालीसौड़ ब्लाक में ही 15 हजार 894 मीट्रिक टन सब्जी उत्पादन दिखाया जा रहा है। इसमें मैदानी मंडियों को आपूर्ति किए जाने वाले आलू का उत्पादन शामिल नहीं है। सरकारी प्रयास का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि किसानों को सब्जी बीज, कीटनाशक मुहैया कराने समेत सब्जी प्रदर्शन के लिए महज 6.63 लाख रुपये का बजट रखा गया है।
सब्जी उत्पादन को प्रोत्साहन की जरूरत
किसानों को सब्जी उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रहे एसबीएमए के परियोजना प्रबंधक गोपाल थपलियाल एवं हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान के सचिव द्वारिका सेमवाल का कहना है कि किसानों को यदि सिर्फ सब्जी उत्पादन पर लगाया जाए और उनके उत्पाद अच्छे दाम पर गांव में ही खरीदने की व्यवस्था हो तो, किसान न सिर्फ स्थानीय खपत को पूरा कर सकते हैं, बल्कि मैदानी मंडियों को भी सब्जी आपूर्ति कर सकते हैं।
लोकल सब्जियों की है मांग
उत्तरकाशी के सब्जी कारोबारी धन सिंह पंवार, अतीक खान आदि का कहना है कि स्थानीय किसानों से मिलने वाली सब्जी ज्यादा दिन तक तरोताजा रहती है और इसकी बाजार में मांग भी काफी है। लेकिन स्थानीय स्तर पर पर्याप्त सब्जी उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें मंडियों से सब्जी मंगानी पड़ती है।
इस साल जिला योजना में सब्जी प्रदर्शन के लिए 6.63 लाख रुपये बजट रखा गया है। इसमें सब्जी बीज, दवा एवं कीटनाशकों का वितरण भी शामिल है।
सुरेश राम, आलू एवं शाक भाजी विकास अधिकारी उत्तरकाशी।