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Uttarkashi News: हर्षिल घाटी में सेब के पेड़ों को क्षति पहुंचा रहे हैं लंगूर

Mon, 23 Feb 2026 07:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
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पेड़ों के छिलके उतारने के साथ ही टहनियों को पहुंचा रहे हैं नुकसान
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बागवानों ने वन विभाग से की ठोस कदम उठाने की मांग
उत्तरकाशी। हर्षिल घाटी में लंगूर सेब के पेड़ों को क्षतिग्रस्त कर काश्तकारों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बर्फबारी के बाद हर वर्ष लंगूर उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं लेकिन वन विभाग की ओर से इन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लंगूर पेड़ों की टहनियों को नुकसान पहुचा रहे हैं।
छोलमी निवासी मनोज नेगी ने बताया कि इस वर्ष की बर्फबारी के बाद एक बार फिर लंगूरों की दहशत से सेब बागवान परेशान हैं। लंगूर सेब के पेड़ों की छिलके उतारने के साथ ही टहनियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कई पेड़ों को पूरी तरह ही क्षतिग्रस्त कर दिया है। उन पर अब उत्पादन नहीं हो सकता। इससे काश्तकारों को सेब उत्पादन की चिंता सताने लगी है।
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उन्होंने कहा कि लंगूर हर वर्ष पेड़ों को क्षतिग्रस्त कर ग्रामीणों को नुकसान पहुचा रहे हैं। वहीं, पिछले कुछ वर्षों में लंगूरों की संख्या बढ़ी है। इस संबंध में कई बार वन विभाग के अधिकारियों के साथ पत्राचार किया गया कि लंगूरों को रोकने के लिए कारगर कदम उठाए जाए लेकिन उस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गत वर्ष की आपदा में उन्हें बहुत अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। इसलिए इस वर्ष उन्हें उम्मीद थी कि सेब के अच्छे उत्पादन से आपदा से हुए नुकसान की भरपाई की जाए लेकिन पहले बारिश और बर्फबारी न होने के कारण फसल पर असर पड़ रहा है। साथ ही लंगूरों की ओर से दोगुना नुकसान किया जा रहा है। सेब बागवानों ने लंगूरों को रोकने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है।
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