ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर की विस्थापन की मांग
नौगांव (उत्तरकाशी)। भू-धंसाव से पलेठा गांव के कई भवन खतरे की जद में हैं। गांव के सार्वजनिक रास्तों सहित कई हेक्टेयर कृषि भूमि भी आपदा की भेंट चढ़ गई है। गांव पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर विस्थापन की मांग की है।
ग्राम प्रधान रोहित रावत ने बताया कि वर्ष 2010 की आपदा में भी गांव को भारी नुकसान हुआ था। कुछ आवासीय भवन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। तत्कालीन आपदा मंत्री खजान दास ने पलेठा गांव पहुंचकर विस्थापन की मांग को जायज ठहराया था तब गांव का विस्थापन तो नहीं हो पाया लेकिन डेढ़ दशक बाद आपदा ने लोगों के जख्मों को फिर से पुनर्जीवित कर दिया है।
छह सितंबर को हुई अतिवृष्टि से गांव को नुकसान हुआ है। आधा दर्जन आवासीय भवन खतरे की जद में आ गए हैं जिन्हें मजबूरन खाली करना पड़ा। लोगों को अब भविष्य का डर सता रहा है। विस्थापन की मांग के लिए उपजिलाधिकारी बड़कोट के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजा गया है। गांव के नीचे हो रहे भू-धंसाव से गांव को खतरा पैदा हो गया है। डर के कारण कुछ परिवारों ने घर खाली कर दूसरे लोगों के घरों में शरण ले रखी है। उन्होंने जिला प्रशासन से जल्द ही गांव को विस्थापन करने की मांग की।