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नारी हूं तो क्या हुआ सम्मान मेरा अधिकार है...

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उत्तरकाशी कलक्ट्रेट आयोजित कवि सम्मेलन में अपनी रचना प्रस्तुत करता युवा कवि। - फोटो : UTTER KASHI
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राष्ट्रीय कवि संगम की ओर से रविवार को कलक्ट्रेट प्रेक्षागृह में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों ने रचनाओं ने श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। युवा कवियत्री सीमा राणा ने महिला सशक्तिकरण पर ‘नारी हूं तो क्या हुआ सम्मान मेरा अधिकार है, हौसले मेरे आसमान को छूएं, पंख उड़ने को बेताब हैं..’ की प्रस्तुति दी।
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कर्तव्य फाउंडेशन फॉर एजुकेशन एंड सोशियल वेलफेयर के सहयोग से आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ ब्लाक प्रमुख भटवाड़ी विनीता रावत, स्वामी देवात्मानंद, रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन अजय पुरी, मनोज पंवार आदि ने किया। कवि संगम की जिला संयोजिका डा. दीपिका वर्मा आरुणि ने कहा कि संस्था का उद्देश्य नये कवियों को मंच प्रदान करना है। मेरठ से पहुंचे राष्ट्रीय कवि श्रीकांत शर्माश्री ने भी अपनी कविताओं से जोश भरा। कवि अवनीश मलासी ने देश के वीर सैनिकों पर ‘वतन के वास्ते सपने सलोने तोड़ आया हूं बनाया था..जिसे हमदम उसे भी छोड़ आया हूं..’, ‘वीरांगनाओं पर..वो आया था तो कंगन चूड़ियां, काजल भी लाया था, जो घुंघरू बज उठी तो थोड़ा मुस्कुराया था..’ से दर्शकों को भावुक कर दिया।
गीता गैरोला ने ‘भूस्खलन हौंदू जब जिकुड़ी झुरांदी.. सड़की वालों भैजी मेरू डाला नी धौल्यां...नीस फंडी डाली रौंदी..तौं नी तोड्या..सड़की बनावा सुझी बुझीक..’ से पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। डा. दिवाकर बौद्ध ने ‘ये शर्म हया आंखों पर रहने दो..मगर नजरे न हमसे चुराया करो..हम ढूंढ लेंगे अपनी मोहब्बत..’ से समा बांधा। सम्मेलन में आनंदी नौटियाल, ऊषा जोशी, उर्मिला सेमल्टी, मुरली मनोहर भट्ट, कल्पना असवाल, राजेश जोशी, उर्मिला चमोली, साधना जोशी ने भी शिरकत की। इस मौके पर डा. एमपीएस परमार, डा. नंदी गड़िया, सभासद सविता भट्ट आदि मौजूद रहे।
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