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Uttarkashi News: ऊंचा-ऊचां सैंडल पैरोलु बनारसी साड़ी... गीत खूब नाचे युवा

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माघ मेले में चला लोक गायिका बीना बोरा व गायक सौरभ मैठाणी के सुरों का जादू
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उत्तरकाशी। पौराणिक माघ मेले (बाड़ाहाट कु थौलू) की चौथी सांस्कृतिक संध्या में लोक गायिका बीना बोरा व लोक गायक सौरभ मैठाणी के गीतों की धूम रही। सौरभ मैठाणी के ऊंचा-ऊंचा सेंडल पैरोलु बनारसी साड़ी... और बीना बोरा के खाई ककड़ी छिलमा लोण पिसा सिलमा... गीत ने युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
बुधवार को माघ मेले की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ लोक गायिका बीना बोरा ने मेरा बाबा कैलाशू का रैवासी... के गायन से किया। इसके बाद उन्होंने खाई ककड़ी छिलमा लोण पिसा सिलमा..., अपुतै सजाई मां... गीत पर खूब तालियां बटोरीं। लोक गायक सौरभ मैठाणी ने पाकी जलाक केला मा..., मेरी सपना स्याली... गीतों की धमाकेदार प्रस्तुति दी। इससे पूर्व दीपा नगर कोटी ने हेनंदा सुनंदा तू धैणी हो जै..., छम छमा हाम हुडकी बाजी..., पल्या गौ का मोहना व दर्शन फर्सवाण ने पट्टी न भगिना हे नंदा भवानी..., दादू गोरिया, मोहनी हरिया साड़ी... सहित अन्य गीतों की प्रस्तुति दी। वहीं बृहस्पतिवार को पशुपालन विभाग की ओर से गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। इसके बाद लोक गायक कीर्ति बंसल, विरेंद्र बिष्ट, दीपक, रीना घलवान, निधि माही, सूरज शाह, हरिमोहन भारती, पीके मस्ताना, रुद्रांश म्यूजिकल बैंड, लोक गायक किशोर कुमार, रणजीत भाई सहित विभिन्न स्कूली बच्चों के लोकगीतों की धूम रही। मेले में दूर दराज क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीणों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया।
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चमाला की चौंरी में देव डोलियों ने किया नृत्य

उत्तरकाशी। देवस्थल चमाला की चौंरी में चल रहा तीन दिवसीय पौराणिक धार्मिक बाड़ाहाट कु थौलु देव डोलियों के मिलन के साथ संपन्न हो गया। इस अवसर पर जिले व क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए पूजा की गई। वहीं चमाला की चौंरी में अंतिम दिन पहुंचे बाडागड्डी क्षेत्र के देवी देवताओं की डोली, ढोल एवं निशाणों का नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। इसके बाद सभी देव डोलियां अपने गांव की ओर रवाना हुए।
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मकर संक्रांति पर्व से शुरू हुए मेले में पहले दिन बाडागड्डी क्षेत्र की देव डोलियां पहुंची तो दूसरे दिन बाड़ाहाट क्षेत्र के कांडार देवता यहां हाथी के स्वांग पर सवार हुए। अंतिम दिन बृहस्पतिवार को चमाला की चौंरी में पहुंचे बाडागड्डी क्षेत्र के हरि महाराज व ओणेश्वर देवता के ढोल, खंडद्धारी, नाग देवता की डोली तथा शंकर देवता के निशाण का नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। बाडागड्डी के शंभू प्रसाद नौटियाल ने बताया कि पौराणिक काल से इस आयोजन में तीन दिनों तक देव डोलियां आती हैं और अंतिम दिन वह अपने मूल थान गांव को प्रस्थान करती हैं। इस मौके पर देव डोलियों के पश्वा उत्तम प्रसाद मिश्रा, विनोद सिंह, विजेंद्र सिंह, मनोज पंवार आदि मौजूद रहे।
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