पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरणविद् डा. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि 16 साल पहले उत्तराखंड राज्य बनाने के लिए राज्य आंदोलनकारियों ने दिल्ली से लड़ाई लड़ी थी और अब हमें गांव बचाने के लिए देहरादून से लड़ाई लड़नी है
अभी तक की जितनी भी सरकारें प्रदेश में बनी है, उन्होंने ब्राह्मण-ठाकुर और गढ़वाली-कुमाऊंनी बताकर हमें आपस में बांटकर अपना उल्लू सीधा करने का काम किया है। हमें इनकी पांच-पांच साल की अदला-बदली का जवाब आने वाले विधानसभा चुनाव में देना है।
गांव बचाओ यात्रा का उत्तरकाशी पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। हनुमान चौक में आयोजित कार्यक्रम में दूरदराज गांवों से दर्जनों महिलाएं और पुरुष पहुंचे थे। जनता को संबोधित करते हुए पर्यावरणविद् डा. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि सरकार और उसके मुखिया ने साल भर पहले कई वादे और घोषणाएं की, लेकिन कितनी धरातल पर उतरी हैं, यह सभी लोग जानते हैं।
कहा गया था कि मंत्री और नेता गांव में जाकर रहेंगे, लेकिन देहरादून छोड़ने को कोई तैयार नहीं है। महात्मा गांधी ने कहा था कि देश बनाना है तो हमें गांव को मजबूत करना होगा, लेकिन आज राजनेताओं ने देश की आत्मा को ही मार दिया है।
राजनेताओं ने गांधी द्वारा बताई गई बातों का गलत अनुसरण किया। खादी के पकड़े पहनकर राजनेताओं ने उनकी कीमत ही बढ़ा दी है, जिसको आम लोग नहीं पहन सकते हैं। उन्होंने कहा कि चिपको आंदोलन की गूंज पूरे विश्व में उठी थी।
इसके बदले में सरकार ने वन कानून लागू करके वनों को आम आदमी की पहुंच से दूर कर दिया। हमें ऐसेे कानूनों का पुरजोर विरोध करना चाहिए जो हमें अपने हक-हकूकों से दूर करें। पिछले 16 सालों में चुनकर आए नेताओं ने अपनी विधानसभा क्षेत्र का विकास कम किया है और उनका विकास ज्यादा हुआ है।
डा. जोशी ने जनता का आह्वान किया कि आगामी चुनाव में अपने नेताओं से हिसाब मांगे। जो हिसाब न दे, उसका जवाब वोट के रूप में दीजिए, क्योंकि नेताओं को वोट की बात ज्यादा समझ में आती है। इस मौके पर द्वारिका सेमवाल, पर्यावरणविद् प्रताप पोखरियाल, छात्रसंघ अध्यक्ष पीजी कॉलेज पृथ्वीपाल मटुड़ा, ओम ग्रुप के संस्थापक अमेरिकन पुरी आदि मौजूद थे।