उत्तरकाशी में सड़क की मांग को लेकर कलक्ट्रेट परिसर में भूख हड़ताल पर बैठे तराकोट के ग्रामीणों को समझाते पीएल शाह।
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उत्तरकाशी। मोटर मार्ग की मांग को लेकर कलक्ट्रेट परिसर में भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीण पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता के बयान से भड़क उठे। अधिशासी अभियंता के माफी मांगने पर ही ग्रामीण शांत हुए। जुणगा-तराकोट और धरासू-तराकोट मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग को लेकर तराकोट क्षेत्र के ग्रामीण दो दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अधिशासी अभियंता राजकुमार आंदोलनरत ग्रामीणों को समझाने पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया, लेकिन जब आंदोलनकारी नहीं माने तो अभियंता ने कह दिया कि ‘आजकल मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन तो चलते ही रहते हैं’।
ईई के इस बयान से ग्रामीण भड़क उठे। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक ईई माफी नहीं मांग लेते, वह विरोध जारी रखेंगे। एडीएम पीएल शाह ने मामले की नजाकत को समझते हुए ग्रामीणों को शांत किया। आखिरकार अधिशासी अभियंता को आंदोलनकारियों से माफी मांगनी पड़ी। भूख हड़ताल पर बैठे रूकम सिंह रावत और हरि पंवार ने कहा कि सड़क के लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्हें लिखित आश्वासन नहीं बल्कि धरातल पर काम चाहिए। सड़क का काम शुरू होने पर ही वह भूख हड़ताल खत्म करेंगे।
लोनिवि के सहायक अभियंता मनमोहन सिंह ने ग्रामीणों को बताया कि जुणगा तराकोट मोटरमार्ग पर पेड़ों के कटान की अनुमति मिलते ही कार्य प्रारंभ करा दिया जाएगा। धरासू-तराकोट सड़क के लिए पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता राजकुमार ने भी 25 दिसंबर तक का समय देने को कहा, लेकिन ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा कि कागजी कार्रवाई से वे नहीं मानेंगे। ग्रामीणों के समर्थन में दूसरे दिन जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह भंडारी, शूरवीर रांगड़, जेपी भट्ट, राजेंद्र रांगड़, बचन लाल और भरत लाल भी धरना स्थल पर मौजूद थे।
भूख हड़ताल समाप्त की
संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले चमियारी से उलण मार्ग का कटिंग कार्य प्रारंभ कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे गमरी क्षेत्र के ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों के आश्वासन पर भूख हड़ताल समाप्त कर दी। आंदोलन स्थल पर विभाग के सहायक अभियंता पंकज अग्रवाल ने ग्रामीणों को उलण मार्ग का कटिंग कार्य छह माह के भीतर प्रारंभ कराने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण मान गए।