बागी गांव के स्कूल में तैनात शिक्षिकाओं और प्रधान के बीच हुआ विवाद पहले थाने और फिर उपखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय जा पहुंचा। प्रभारी प्रधानाध्यापिका ने प्रधान पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और अन्य शिक्षिकाओं ने स्कूल आते-जाते अपशब्द कहने का आरोप लगाया है। जबकि प्रधान समेत अन्य ग्रामीणों ने शिक्षिकाओं के समय पर विद्यालय नहीं आने से शिक्षा व्यवस्था बदहाल होने का आरोप लगाते हुए उनके स्थानांतरण की मांग की है।
बता दें कि बागी गांव के कन्या जूनियर हाईस्कूल में 18 छात्राओं पर तीन और बेसिक स्कूल में 19 छात्र-छात्राओं पर दो शिक्षिकाएं तैनात हैं। शुक्रवार को स्कूल की छुट्टी के बाद जब शिक्षिकाएं घर लौट रही थीं, तभी प्रधान सोबन सिंह भंडारी स्कूल में आए। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रतिनिधियों को विद्यालय की बदहाली के बारे में बता रहे थे।
उन्होंने शिक्षिकाओं के समय पर स्कूल नहीं आने से शिक्षा व्यवस्था बदहाल होने का आरोप लगाया। इस पर शिक्षिकाओं ने आपत्ति जताई और दोनों पक्षों के बीच विवाद खड़ा हो गया। कन्या जूनियर हाईस्कूल की प्रधानाध्यापिका सुनीता ने थाने पहुंचकर प्रधान पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने और अपनी जान को खतरा होने की शिकायत की।
यहां से उपखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानाध्यापिका समेत अन्य शिक्षिकाओं ने प्रधान एवं अन्य ग्रामीणों पर अपशब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। थाने और उपखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे प्रधान एवं ग्रामीणों ने शिक्षिकाओं के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए विद्यालयों में शिक्षा की बदहाली के लिए शिक्षिकाओं के देर से स्कूल आने को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने शिक्षिकाओं को अन्यत्र ट्रांसफर नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी। थानाध्यक्ष रविंद्र यादव ने दोनों पक्षों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाकर मामला शांत कराया। उपखंड शिक्षा अधिकारी अनीता द्विवेदी ने कहा कि वे मामले की जांच रिपोर्ट 27 जुलाई को जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक को सौंपेंगी। इस मौके पर बागी के प्रधान सोबन भंडारी, कोट के प्रधान वीरेंद्र पंवार, फिंचर सिंह नेगी, प्रताप सिंह, मालचंद, बचन दास, पुलम प्रकाश, मुलमदास, त्रेपन सिंह, विजेंद्र पाल, राजेंद्र आदि मौजूद रहे।