आपदा प्रभावित धराली के ग्रामीणों ने लगाया विकास कार्य रोकने का आरोप
बोले, सड़क चौड़ीकरण पर रोक लगाने वालों का करेंगे विरोध
उत्तरकाशी। आपदा प्रभावित धराली के ग्रामीणों ने भैरोघाटी में रक्षासूत्र बांधने गए पर्यावरणविदों का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों के कारण ही क्षेत्र का विकास रुका है। पहले इनके कारण ही उत्तरकाशी से गंगोत्री तक के करीब 100 किमी क्षेत्र में ईको सेंसटिव जोन के कारण कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर रोक लग गई। वहीं अब सड़क के चौड़ीकरण पर रोक लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
आपदा प्रभावित धराली के ग्रामीण रविवार को जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए। उन्होंने भैरो घाटी में रक्षासूत्र बांधने गए पर्यावरणविदों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि आपदा के कारण पहले ही उनका विकास रुका हुआ है। वहीं अब सड़क चौड़ीकरण का विरोध होने के कारण उनके भविष्य को अधर में लटकाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरणविदों की ओर से आंकड़े दिए जा रहे हैं कि गंगोत्री हाईवे के चौड़ीकरण में करीब छह से सात हजार पेड़ कट रहे हैं लेकिन वन विभाग और बीआरओ के आंकड़ों के अनुसार मात्र 3500 पेड़ ही चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं। इसमें उनके सेब और अखरोट आदि के पेड़ भी शामिल हैं। पहले ही सड़क चौड़ीकरण के मानकोें को घटाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगोत्री धाम सहित उनका धराली गांव और हर्षिल गांव भारत-चीन सीमा पर स्थित है। चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा तक रेल पहुंचा चुका है लेकिन हमारी अभी तक सड़क का चौड़ीकरण ही नहीं हो पाया है। पर्यावरणविद दिल्ली और देहरादून में बैठकर संरक्षण की पैरवी कर रहे हैं। इससे क्षेत्र का विकास रुक रहा है। इसलिए धराली सहित पूरा हर्षिल क्षेत्र इन पर्यावरणविदों का विरोध करता है।
वहीं उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि पहले विकास को वरियता दी जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इस मौके पर प्रधान अजय नेगी, सुशील पंवार, भूपेंद्र पंवार, संजय पंवार, महेश पंवार, भागवत पंवार, उदय पंवार, सतेंद्र पंवार, राजेश पंवार, जयभगवान पंवार आदि मौजूद रहे।