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Uttarkashi News: सूखे ने बढ़ाई सेब काश्तकारों की चिंता

Sat, 07 Dec 2024 06:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
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नौगांव (उत्तरकाशी)। बारिश नहीं होने से रवांई घाटी के हजारों सेब काश्तकारों की चिंता बढ़ गई है। सूखे की वजह से सेब काश्तकार बगीचों में पौधों की काट-छांट नहीं कर पा रहे है। वहीं, काश्तकार नई पौध लगाने के लिए गड्ढे भी तैयार नहीं कर पा रहे हैं। अभी तक पौधों को गोबर की खाद देने के लिए थाले नहीं बना पाए हैं।
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काश्तकारों का कहना है कि सर्दियों में जब औसत तापमान सात डिग्री सेल्सियस से कम हो जाता है, तब सेब की सुप्त अवस्था शुरू होती है। जो करीब तीन महीने तक चलती है। पौधे में मौजूद पोषक तत्व जड़ों में चले जाते हैं। चिलिंग ऑवर्स पूरा होने पर पोषक तत्व पूरे पौधे में फैल जाते हैं, जिससे उत्पादन अच्छा होता है। अभी तक क्षेत्र में बारिश नहीं हुई है, जिससे चिलिंग ऑवर्स पूरा न होने में उत्पादन पर असर पड़ना तय है।
बीते वर्ष भी इसी तरह की स्थिति के कारण सेब की फसल का 50 प्रतिशत उत्पादन कम हुआ था। अधिकांश काश्तकार बगीचों से दवाई, खाद और मजदूरों की दिहाड़ी तक नहीं निकाल पाए थे। इस समय भी वही स्थिति है। बीते वर्ष छोटे सेब उत्पादकों की करीब 80 प्रतिशत फसल खराब हो गई थी और उन्हें वर्षभर में बगीचों के रखरखाव पर हुए खर्च का पैसा भी नही मिल पाया था। इस वर्ष बेमौसमी सूखे ने सेब उत्पादकों की मुश्किलें ज्यादा बढ़ा दी है।
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रवांई घाटी में अधिकांश लोगों की आजीविका सेब की फसल पर निर्भर है, स्योरी फल पट्टी में करीब 1200 परिवारों के सेब के बाग हैं, जिससे लोग अपनी जरूरतों को पूरा करते हैं। सेब उत्पादक विजय बंधानी, कृपाल सिंह, दिवान असवाल का कहना है कि बारिश नहीं होने से पड़ रहे सूखे ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। बगीचों में जो कार्य इस माह तक हो जाने थे, वो नहीं हो पा रहे हैं। चिलिंग ऑवर्स पूरा न होने से उत्पादन पिछले साल से भी कम होने की आशंका है।


काश्तकारों को जनवरी में कांट-छांट करनी चाहिए। जल्दी कांट-छांट से सेब में कैंकर होने का खतरा रहता है। चिलिंग ऑवर्स के लिए तो 15 दिसंबर के बाद तापमान गिरता है। अभी कोई चिंता की बात नहीं है। कम बारिश और तापमान से नुकसान होता है, तो बीमा कंपनियां भरपाई करती है। काश्तकारों को फसल बीमा कराना चाहिए।
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-डीके तिवारी, मुख्य उद्यान अधिकारी, उत्तरकाशी।
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