आपदा में वर्ष 2021 में बह गया था पुल, डीपीआर को नहीं मिली मंजूरी
उत्तरकाशी। तेखला मांडो बाईपास पर बना पुल वर्ष 2021 की आपदा में बह गया था। उसके चार वर्ष बाद भी पुल निर्माण के लिए प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की ओर से किसी प्रकार की पहल नहीं की जा रही है। वहीं अभी तक पुल निर्माण की पहली प्रक्रिया डीपीआर को ही स्वीकृति नहीं मिल पाई है। पुल बहने के बाद बनाई गई वैकल्पिक मार्ग भी इस वर्ष की आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया है।
वर्ष 2021 में मांडो गदेरे में आए पानी और मलबे ने पूरे गांव में तबाही मचाई थी। इस दौरान तीन लोग मलबे में दब गए थे। वहीं गांव के बीच से जाने वाले मांडो-तेखला बाईपास पर मोटर पुल बह गया था। उसके बाद लोक निर्माण विभाग की ओर से गदेरे के बीच में ही सड़क तैयार कर आवाजाही शुरू करवाई गई लेकिन वहां पर ह्यूम पाइप और कलवर्ट नहीं बिछाया गया। इससे हर मानसून में गदेरे में आने वाले पानी से लगातार मार्ग पर कटाव हो रहा था।
वहीं इस वर्ष गदेरे में आए मलबे के कारण वह आधा मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। इससे वाहनों की आवाजाही में खतरा बना है। मार्ग से हर दिन लोडर वाहन और स्कूल बसें आदि का आवागमन होता है। वहीं पुल बहने के दौरान दोनों ओर क्षतिग्रस्त सड़क का अभी तक सही नहीं की गई है। इससे गदेरे का पूरा पानी सड़क सहित लोगों के घरों घुस रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण सहित पानी से सड़क की सुरक्षा की मांग की जा रही है लेकिन प्रशासन और लोनिवि इस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर रहा है। हर बार डीपीआर तैयार की जा रही है यही आश्वासन दिया जाता है। लोनिवि के सहायक अभियंता स्वराज चौहान का कहना है कि पुल निर्माण के लिए पहली डीपीआर में कुछ कमियों को पूरा करने के लिए कहा गया है। उसके बाद फाइनल डीपीआर भेजी जाएगी।