साबुन से धो रहे हैं कपड़े, बोले-होटल व धर्मशाला वाले नहीं धोने दे रहे
प्रशासन ने नदी किनारे नहीं लगाए हैं जागरूकता बोर्ड, स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण पर उठ रहे सवाल
उत्तरकाशी। नगर क्षेत्र में नदी किनारे श्रद्धालुओं के कपड़े धोने से गंगा नदी प्रदूषित हो रही है। नगर के मणिकर्णिका घाट में शनिवार को कई श्रद्धालु साबुन लगाकर कपड़े धोते नजर आए। इससे नदी की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा जैसी पवित्र नदी में इस प्रकार की गतिविधियां धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने का काम कर रही है। वहीं नदी में कपड़े धोने वाले यात्रियों का कहना है कि होटल और धर्मशालाओं में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई होटल संचालक पानी की कमी का हवाला देकर कपड़े धोने की अनुमति नहीं देते। ऐसे में श्रद्धालु नदी किनारे कपड़े धोने को मजबूर हैं।
साबुन और डिटर्जेंट के उपयोग से नदी का पानी दूषित हो रहा है जिसका असर जलीय जीवों और पर्यावरण पर भी पड़ सकता है। साथ ही लोगों की गंगा के प्रति गहरी आस्था को भी ठेस पहुंच रही है। गंगा विचार मंच के प्रदेश संयोजक लोकेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि प्रशासन की ओर से घाटों पर जागरूकता संबंधी साइन बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। यदि घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाए और लोगों को नदी स्वच्छ रखने के लिए जागरूक किया जाए तो इस समस्या पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने नगरपालिका और स्थानीय प्रशासन से घाटों की नियमित निगरानी और स्वच्छता नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की है।