जर्जर आईटीआई भवनों का डिस्मेंटल प्रमाणपत्र अटका
बड़कोट। नगर के बीचोंबीच स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के जर्जर भवन विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप, कई बार पत्राचार और भवनों के निरीक्षण के बावजूद लोनिवि अब तक डिस्मेंटल प्रमाणपत्र जारी नहीं कर पाया है। नतीजतन, नए छात्रावास के निर्माण की योजना कागजों में अटकी है और परिसर असुरक्षित बना हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि एक ओर संस्थान के भवनों से दुर्घटना का खतरा बना है वहीं दूसरी ओर नगर के बीचोंबीच स्थित बेशकीमती सरकारी जमीन बदहाल पड़ी है। परिसर में जंगली जानवरों और नशेड़ियों की आवाजाही की शिकायत है लेकिन भवनों के निस्तारण और भूमि के सदुपयोग की दिशा में ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
आईटीआई के प्रधानाचार्य हरि प्रसाद सेमवाल के अनुसार, जर्जर भवनों का डिस्मेंटल प्रमाणपत्र जारी करने के लिए लोनिवि बड़कोट को कई बार पत्र भेजे गए। विभागीय निरीक्षण भी हो चुका है लेकिन प्रमाणपत्र नहीं मिलने से नए छात्रावास के निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही। विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा संस्थान और सरकारी संपत्ति को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं, लोनिवि के एई सीताराम डोभाल का कहना है कि आईटीआई कर्मी स्पष्ट रूप से उन भवनों को नहीं दिखा पा रहे हैं जिन्हें ध्वस्त किया जाना है। उनका कहना है कि आईटीआई से पत्र मिलने पर मामले को दिखवाया जाएगा।