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आशा, आंगनबाड़ी एवं भोजन माताओं ने किया सांकेतिक धरना प्रदर्शन

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उत्तरकाशी। सरकारी कर्मचारी घोषित करने व न्यूनतम मानदेय 18 हजार प्रतिमाह आदि मांगों को लेकर आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा भोजन माताओं ने जिला मुख्यालय पर सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया।
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ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन (एटक) के बैनरतले शनिवार को आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा भोजन माताएं जिला मुख्यालय पर एकत्र हुईं। उन्होंने कहा कि आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी कोविड-19 के दौरान फ्रंटलाइन वॉरियर के तौर पर सेवाएं दे रही हैं। सरकार ने अन्य सरकारी कर्मचारियों का तो 50 लाख का बीमा किया है, लेकिन उन्हें इस सुविधा से वंचित रखा गया है। मजदूर नेता कामरेड महावीर प्रसाद भट्ट ने कहा कि एक ओर तो सरकार महिला सशक्तीकरण का ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी ओर फ्रंटलाइन वॉरियर के तौर पर सेवाएं दे रही आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है। प्रदर्शनकारियों में सुमनलता, रेखा नौटियाल, सरिता जोशी, ऊषा भट्ट, सुलोचना, करिश्मा, सुनीता, गंगा रावत, निर्मला उनियाल, विजया, निर्मला चौहान, रीना खरोला, सावित्री नौटियाल, सुलोचना राणा, भागेश्वरी, अर्चना बलूनी आदि मौजूद रहे।
कोटद्वार। निश्चित मानदेय देने की मांग को लेकर दुगड्डा ब्लॉक की आशा कार्यकर्ताओं ने शनिवार को लगातार दूसरे दिन उपकेंद्रों पर कार्य बहिष्कार करते हुए प्रदर्शन किया। शनिवार को कार्य बहिष्कार के दूसरे दिन मोटाढांक, पदमपुर, झंडीचौड़, लालपानी और काशीरामपुर तल्ला स्थित उपकेंद्र में आशा कार्यकर्ता एकत्र हुईं। यहां उन्होंने निश्चित मानदेय देने की मांग को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना प्रदर्शन किया। दुगड्डा ब्लाक की अध्यक्ष प्रभा चौधरी ने कहा कि अल्प मानदेय में आशाओं को अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है। प्रदर्शनकारियों में उपाध्यक्ष मीरा नेगी, गीता जदली, विजयलक्ष्मी, लक्ष्मी गुसाईं, संजू नेगी, माहेश्वरी देवी, सुनीता आदि शामिल रही।
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