नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (निम) में संग्रहालय निर्माण के लिए आए कामगार लॉकडाउन की वजह से यहीं फंसकर रह गए। अब उन्होंने घरवापसी के लिए सरकार से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि अगर मदद नहीं मिली तो वह पैदल ही घर लौटने को मजबूर होंगे।
निम प्रशासन संस्थान परिसर में एक विश्व स्तरीय संग्रहालय का निर्माण करा रहा है, जिसका उद्घाटन बीते मार्च के अंतिम सप्ताह में राष्ट्रपति को करना था। संग्रहालय के अंतिम चरण के कार्य के लिए निम प्रशासन ने दिल्ली से 11 शिल्पकारों और कामगारों की टीम को बुलाया था।
दल के मुखिया और प्रसिद्ध शिल्पकार जीएम पहाड़ी ने कहा कि निम प्रशासन उन्हें भोजन, आवास आदि सभी सुविधाएं दे रहा है। लेकिन अब कामगारों को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो रही है। दिल्ली में मौजूद उनके परिवार वाले भी दिक्कत झेल रहे हैं। कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से मदद मांगी थी, लेकिन कुछ न होने पर अब उनकी उम्मीद उत्तराखंड और दिल्ली सरकार पर टिकी हैं।
जिले में सभी मजदूरों को राशन, आवास आदि सुविधा देने के साथ ही ऑल वेदर रोड आदि निर्माण कार्यों में लगाया गया है, ताकि रोजगार पर आंच न आए। बाहरी मजदूरों की घर वापसी को अभी सरकार की तरफ से कोई दिशा निर्देश नहीं है।
-डॉ. आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।
बाहरी राज्यों के साढ़े तीन हजार श्रमिक
उत्तरकाशी। लॉकडाउन के कारण जिले में विभिन्न राज्यों के साढ़े तीन हजार से अधिक श्रमिक और कामगार फंसे हुए हैं। सरकारी शिविर में रह रहे केवल 25 लोग ही घर वापसी के इच्छुक हैं।