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ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार

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चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)। मोबाइल टावर लगाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। विभिन्न राज्यों में सक्रिय इस गिरोह ने बड़कोट व ब्रह्मखाल क्षेत्र के दो लोगों के साथ करीब ढाई लाख की ठगी की है। बुधवार को धरासू व बड़कोट थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने उत्तर प्रदेश के बरेली से गिरोह में शामिल 12 लोगों को गिरफ्तार किया।
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बीते नौ अक्तूबर को पनोथ ब्रह्मखाल के प्रधान जयवर्धन शाह ने धरासू थाने में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने खुद को मोबाइल कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए उनकी जमीन पर मोबाइल टावर लगाने का प्रस्ताव दिया था जिसके एवज में उनसे एक लाख 39 हजार रुपये ठगे गए। मामले की पड़ताल करने पर पुलिस को पता चला कि बीते 15 मई को बड़कोट थाने में भी पाली गांव के प्रधान फुस्या लाल ने इसी तरह एक लाख 16 हजार रुपये की ठगी का मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद धरासू व बड़कोट थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने ठगी में प्रयोग किए गए बैंक खातों की पड़ताल शुरू की। इसके माध्यम से पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बरेली शहर स्थित मॉडल टाउन के निकट सिटी हार्ट सेंटर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। यहीं बैठकर ये शातिर ठग देश के विभिन्न राज्यों के लोगों को ठग रहे थे।
बुधवार को पुलिस टीम ने कॉल सेंटर पर छापामार कर गिरोह में शामिल सात महिलाओं सहित 12 लोगों को धर दबोचा। साथ ही उनके द्वारा प्रयोग किए जा रहे कंप्यूटर, प्रिंटर, 25 मोबाइल फोन, कई कंपनियों के सिम कार्ड व फर्जी स्टॉप पेपर भी बरामद किए। बृहस्पतिवार को मामले का खुलासा करते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरोह में शामिल बरेली निवासी रहीम खान, दिलशाद, रिहाना रजा खान, मुख्तार खान, ज्योति, निधि यादव, दीपिका, प्रभा, शिवानी, मनप्रीत एवं शाहजहांपुर यूपी निवासी अलका, वेद प्रकाश निवासी ऊधमसिंह नगर को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भादंसं की धारा 420, 419, 467, 468, 471, 120बी व 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई की जा रही है। गिरोह का भंडाफोड़ करने वाली टीम में निरीक्षक रवींद्र यादव, थानाध्यक्ष विनोद थपलियाल, एसआई विनोद पंवार एवं रोहित कुमार तथा कांस्टेबल प्रदीप, सतेंद्र भंडारी, महिदेव चौहान, गुलशन नेगी, अजय चंदेल, रिंकी कैंतूरा व कोमल डोभाल शामिल हैं।
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कोट....
अंतरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ कर पुलिस टीम ने सराहनीय कार्य किया है। टीम को मेरी ओर से ढाई हजार ईनाम दिया जा रहा है। साथ ही डीआईजी से भी टीम के लिए ईनाम की घोषणा का अनुरोध किया गया है। लालच में आकर लोग इस तरह की ठगी का शिकार होते हैं।
-ददनपाल, एसपी उत्तरकाशी।


ऐसे करते थे ठगी
पुलिस ने बताया कि गिरोह किसी प्रचलित मोबाइल कंपनी का प्रतिनिधि बनकर अपने शिकार को फोन करते थे, जिन्हें मोबाइल टावर लगाने के बदले प्रतिमाह 20 से 30 हजार रुपये किराए का झांसा दिया जाता था। इसके एवज में शिकार से रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर 2100 रुपये खाते में डलवाए जाते थे। दूसरे चरण में कंपनी के फर्जी चेक की फोटो लोगों के मोबाइल में भेजकर धनराशि प्राप्त करने के लिए दोबारा टीडीएस के तौर पर 18 से 20 हजार रुपये वसूले जाते थे। इस बीच संदेह की स्थिति खत्म करने के लिए गिरोह के सदस्य लोगों के एकाउंट में थोड़ी बहुत धनराशि भी डाल देते थे, लेकिन कुछ समय बाद 50 लाख का बीमा कराने के लिए 20-20 हजार रुपये की किश्त खाते में जमा करायी जाती थी, जिसके कुछ दिन के बाद आरोपी गायब हो जाते थे।
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