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Uttarkashi News: सीमांत गांव लिवाड़ी में दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्थाएं

Mon, 01 Jun 2026 05:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
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डॉक्टर विहीन हुआ लिवाड़ी एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्र, ग्रामीण परेशान
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तीन दशक बाद भी लिवाड़ी स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों का अभाव
पुरोला। मोरी प्रखंड के सीमांत एवं अंतिम गांव लिवाड़ी में तीन दशक पूर्व स्थापित एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्र आज भी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि वर्षों बीतने के बावजूद स्वास्थ्य केंद्र अपेक्षित संसाधनों और चिकित्सा सुविधाओं से वंचित है। सीमांत क्षेत्र होने के बावजूद पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं, आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ स्वास्थ्य कर्मी उपलब्ध नहीं हो सके हैं।
तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में पर्वतीय विकास मंत्री रहे स्व. बरफिया लाल जुवांठा की पहल पर वर्ष 1993 में मोरी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ फिताड़ी में आयुर्वेदिक एवं लिवाड़ी में एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। वर्ष 1998 में इन केंद्रों का संचालन प्रारंभ हुआ, लेकिन उत्तराखंड राज्य गठन के करीब 26 वर्ष बाद भी सीमांत क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि उस समय जखोल से आगे सड़क सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों और गर्भवती महिलाओं को डंडी-कंडी के सहारे लंबी दूरी तय कर मोटर मार्ग तक पहुंचाना पड़ता था। ग्रामीण मनोज रावत एवं गुरुदेव रावत का कहना है कि सामान्य बीमारियों के उपचार के लिए भी लोगों को कई बार अन्य स्थानों का रुख करना पड़ता है।
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क्षेत्र में गंभीर रूप से बीमार बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और प्रसूता माताओं को उपचार के लिए 62 किलोमीटर दूर सीएचसी मोरी अथवा 98 किलोमीटर दूर उपजिला चिकित्सालय पुरोला ले जाना पड़ता है। अस्पताल प्रभारी डॉ. नितेश रावत ने बताया कि लिवाड़ी एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्र में पूर्व में चिकित्सक की तैनाती हुई थी लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद वर्तमान में चिकित्सक और फार्मासिस्ट का पद रिक्त है। केंद्र में एएनएम कार्यरत हैं। स्वास्थ्य केंद्र के लिए भूमि उपलब्ध है।
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