पाडुली नाले की गंदगी सीधे भागीरथी में जा रही
नगर में कहीं नाले बने कूड़ाघर, तो कहीं दूषित कूड़ा खाने को मजबूर मवेशी
उत्तरकाशी। नगर क्षेत्र में उचित कूड़ा प्रबंधन नहीं होने के कारण यह बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। ज्ञानसू के पाडुली नाले में कई क्विंटल जैविक और अजैविक कूड़ा पड़ा होने के कारण वह पर्यावरण सहित भागीरथी नदी को दूषित कर रहा है। साथ ही ताबांखानी में एकत्रित किए जा रहे नगर के कूड़े का भी उचित प्रबंधन नहीं होने के कारण वहां पर मवेशी दूषित कूड़ा खाने को मजबूर हैं।
नगर पालिका बाड़ाहाट और जिला प्रशासन की ओर से नगर में उचित कूड़ा प्रबंधन के दावे किए जा रहे हैं लेकिन उनकी जमीनी हकीकत कुछ ओर ही है। पालिका की ओर तांबाखानी में हटाए गए पुराने कूड़े को हटाकर इसका खूब प्रचार-प्रसार किया गया लेकिन पालिका के पास नगर के नए कूड़े के निस्तारण के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।
स्थिति यह है कि ज्ञानसू के पाडुली नाला पूरी तरह कूड़ाघर बना है। उसके मुहाने से लेकर निकासी तक कई क्विंटल जैविक और अजैविक कूड़ा वहां पर पड़ा है लेकिन उसके निस्तारण के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। वहीं, बारिश के दौरान यह कूड़ा सीधा बहकर जोशियाड़ा झील में गिरता है।
इसके साथ ही ताबांखानी में नगर को प्रतिदिन करीब 15 टन कूड़ा एकत्रित हो रहा है लेकिन उसका निस्तारण न होने के कारण अब वह मवेशियों और बंदरों का घर बना हुआ है। वहां पर गाय दूषित कूड़ा खाने को मजबूर हैं। साथ ही बंदर उस कूड़े को खाने के साथ ही आसपास सड़कों पर फेंक रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब गर्मियों में यह महामारी का रूप ले सकता है। ईओ शालिनी चित्राण ने कहा कि ताबांखानी में एकत्रित नए कूड़े का मैन्यूली छंटाई की जा रही है। एक-दो दिन में उसे निस्तारण के लिए भेजा जाएगा। साथ ही पाडुली नाले में पड़े कुड़े को जल्द साफ किया जाएगा।