यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम के कपाट खुलने को महज एक सप्ताह शेष है, लेकिन अभी तक धामों और यात्रा पड़ावों पर मूलभूत सुविधाएं बहाल नहीं हो पाई हैं। लॉकडाउन के चलते अभी तक तीर्थ पुरोहित भी मां गंगा और यमुना के प्रवास स्थल वाले गांवों तक नहीं पहुंच पाए हैं। कोरोना महामारी के इस दौर में देश-विदेश से तीर्थयात्रियों के यहां पहुंचने की उम्मीद कम ही है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में धामों में परंपराओं का निर्वहन करने वाले तीर्थ पुरोहितों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
26 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम के कपाट खोले जाने हैं। बीते सालों में देखें तो कपाट खुलने से एक माह पहले से यात्रा की तैयारियां शुरू हो जाती थीं। अभी तक यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम तथा यात्रा पड़ावों पर एक भी दुकान नहीं खुली है। सर्दियों में पलायन कर बड़कोट एवं उत्तरकाशी मुख्यालय के आसपास के इलाकों में रह रहे तीर्थ पुरोहित भी लॉकडाउन के चलते यहीं फंसे हैं। उन्हें खरसाली और मुखबा गांव तक जाने की अनुमति भी नहीं मिल पाई है।
सर्दियों में हुई भीषण बर्फबारी से यमुनोत्री धाम में कई निर्माण क्षतिग्रस्त पड़े हैं। जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग की रैलिंग जगह-जगह टूटी पड़ी है। यमुनोत्री मंदिर परिसर में बने टीन शेड और मंदिर समिति के खाद्यान्न भंडार को भी काफी नुकसान पहुंचा है। गंगोत्री धाम में पेयजल लाइनें फटी पड़ी हैं, जबकि सार्वजनिक शौचालय भी उपयोग के लायक नहीं हैं।
शीघ्र व्यवस्थाएं दुरुस्त कराए प्रशासन
उत्तरकाशी। गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल तथा यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव कृतेश्वर उनियाल का कहना है कि लॉकडाउन के चलते चार धाम यात्रा के साथ ही धामों की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। तीन मई को लॉकडाउन समाप्त होने के बाद आंशिक तौर पर ही सही, लेकिन चार धाम यात्रा चलने की उम्मीद है।
लॉकडाउन के कारण यात्रा व्यवस्थाएं चाक चौबंद करने के कार्यों में कुछ अड़चन आई है। फिर भी सड़क, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य, सफाई, संचार आदि सुविधाओं से जुड़े विभागों को कपाट खुलने से पूर्व धामों और यात्रा पड़ावों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
डा. आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।