राज्य में छानियों को पर्यटन से जोड़ने के ‘छानी अभियान’ की शुरुआत खिला टॉप ट्रेक से हुई। जाड़ी संस्थान की ओर से आयोजित अभियान में ट्रेकिंग के लिए पांच सदस्यीय दल जुगुल्डी गांव से खिला टॉप के लिए रवाना हुआ। दल छानियों में रहने वाले ग्रामीणों व ट्रेक के बारे में जानकारी जुटाएगा।
हिमालय पर्यावरण एवं जड़ी बूटी एग्रो संस्थान (जाड़ी) के द्वारिका प्रसाद सेमवाल, रेणुका समिति के संदीप उनियाल, शैलेंद्र गोदियाल, राजीव व नितिन ने जुगुल्डी गांव से ट्रेकिंग शुरू की। करीब तीन किमी के सफर के बाद दल खिला टॉप पहुंचा। यहां ग्रामीणों की कई छानियां हैं। जुगुल्डी के ग्राम प्रधान अनिल पंवार के सहयोग से छानियों में रह रहे ग्रामीणों से जानकारी जुटाई। सेमवाल ने कहा कि आज पलायन से खाली हो रहे गांवों, छानियों को पर्यटन से जोड़कर पलायन को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से छानी अभियान की शुरुआत की गई है। इसमें प्रकृति पर्यटन के इच्छुक लोग गांवों की ओर आएं और बुग्याल या पर्यटक स्थलों के आसपास निर्मित इन छानियों का महत्व समझें। बताया कि छानियां पर्यटन से जुड़ती हैं तो इससे ग्रामीणों की आजीविका भी बढ़ेगी। साथ ही छानियों के संरक्षित रहने से वन माफियाओं पर नियंत्रण रहेगा।