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रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर प्रतिबंध से किसान परेशान

Fri, 05 Feb 2016 08:57 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाल उत्तरकाशी
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उत्तरकाशी। सेब की पैदावार करने वाले किसान परेशान हैं। कारण कि सरकार ने रासायनिक खाद, कीटनाशक और फफूंदीनाशक दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। ऐसे में हर्षिल उपला टकनौर के सेब पर खतरा मंडरा रहा है।
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मैदानी मंडियों में हर्षिल उपला टकनौर के सेब पर इस बार खतरा मंडरा रहा है। सरकार ने भटवाड़ी को जैविक ब्लाक घोषित किया है। इसके साथ ही उद्यान विभाग ने सरकारी फरमान का पालन करते हुए यहां रासायनिक खाद, कीटनाशक एवं फफूंदीनाशक दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। उपला टकनौर क्षेत्र के 744.22 हेक्टेयर सेब उत्पादन क्षेत्र में सालाना 4569 टन सेब की पैदावार होती है। गंगोत्री घाटी के उपला टकनौर क्षेत्र के आठ गांवों की आजीविका मुख्यतया सेब की फसल पर निर्भर है।
सुक्की के मोहन सिंह, धराली निवासी भटवाड़ी के कनिष्ठ उपप्रमुख संजय पंवार, हर्षिल के डॉ. नागेंद्र सिंह आदि का कहना है कि बिना किसी पूर्व तैयारी और वैकल्पिक इंतजाम के भटवाड़ी को जैविक ब्लाक घोषित करने का तुगलकी फरमान गलत है। इस समय सेब के बागीचों में पेड़ों की कटाई छंटाई चल रही है। कटी टहनियों को रोगाणुओं से बचाने के लिए चौबटिया पेस्ट लगाना जरूरी है। इसके साथ ही फफूंदीनाशक दवा के स्प्रे की भी जरूरत है। कुछ लोग चोरी छिपे सरकारी प्रतिबंध के बावजूद कीटनाशकों एवं फफूंदीनाशकों के अलावा रासायनिक खाद का भी प्रयोग कर रहे हैं।
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कोट
शासनादेश के बाद भटवाड़ी में रासायनिक खाद और कीट एवं व्याधि नाशक दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। किसान अपनी समस्या लेकर शासन और उद्यान निदेशालय तक पहुंचे, किंतु अभी तक उन्हें कोई संशोधित शासनादेश प्राप्त नहीं हुआ। बगीचों में कटाई छंटाई के बाद चौबटिया पेस्ट नहीं लगाया गया तो पेड़ों के रोगग्रस्त होने का खतरा रहता है।
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- नरेंद्र यादव, जिला उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी।
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