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मजदूरों व निराश्रितों के सामने रोटी का संकट

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लॉकडाउन के दौरान काम कारोबार ठप पड़ने से बाहरी क्षेत्रों से आए मजदूरों के समक्ष आजीविका के साथ ही दो वक्त की रोटी जुटाने का संकट खड़ा हो गया है। इन मजदूरों को दूरस्थ राज्यों में रह रहे अपने परिजनों की चिंता भी सताने लगी है। ऐसे में कई मजदूर तो पैदल ही अपने घर लौटने लगे हैं।
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बिहार, नेपाल, झारखंड, उड़ीसा आदि राज्यों से यहां मजदूर आए हैं। लॉकडाउन के चलते काम ठप होने से मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। राशन कार्ड नहीं होने के कारण इन्हें सरकारी सस्ता गल्ला की दुकान से भी राशन नहीं मिल रहा। कमोबेश यही स्थिति जिले के विभिन्न शहरों में मांग कर अपना पेट भरने वाले बेघर, बेसहारा, भिखारी एवं साधुओं की भी है।
ऑल वेदर रोड परियोजना में कार्य कर रहे बारामूला जम्मू कश्मीर के डेढ़ दर्जन मजदूर बृहस्पतिवार को अपने मेट पर बिफर गए। उन्होंने मेट से गांव छोड़ने की मांग की। मामला पुलिस तक पहुंचा, तो पुलिस ने भी उन्हें लॉकडाउन में कहीं जाने की अनुमति नहीं होने की बात कहते हुए समझाने की कोशिश की। लेकिन आठ मजदूर पैदल ही घर के लिए चल पड़े। दर्जी की दुकान में काम करने वाले बिजनौर के कुछ कारीगरों ने भी थाने पहुंचकर अपने घर जाने की गुहार लगाई। पुलिस ने इन लोगों को उच्चाधिकारियों से बात कर जल्द ही राशन पानी की व्यवस्था का भरोसा दिलाया।
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एसडीएम देवेंद्र नेगी ने बताया कि डीएम के निर्देश पर जिले में बाहर से आकर कार्य करने वाले बिना राशन कार्ड वाले श्रमिकों व निराश्रितों को चिह्नित किया जा रहा है। मजदूरों के लिए सात दिन की जरूरत के सामान के पैकेट तैयार कराए जा रहे हैं, जो समाज कल्याण विभाग, तहसील एवं ब्लाक के माध्यम से वितरित कराए जाएंगे। निराश्रित लोगों के लिए खाने के पैकेट तैयार कराकर उन्हें मौके पर ही वितरित किए जा रहे हैं।
मजदूरों के हर्षिल पहुंचने पर हड़कंप
उत्तरकाशी/श्रीनगर। पूरे देश में लॉक डाउन के बावजूद बाहरी क्षेत्रों से लोगों की आवाजाही जारी रहने से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। बुधवार देर रात को हरिद्वार आदि स्थानों से एक दर्जन से ज्यादा मजदूर हर्षिल पहुंचने से यहां हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराकर इस संबंध में कार्रवाई की मांग की है।
पैदल ही निकले घर की ओर
श्रीनगर/चंबा। श्रीनगर पहुंचे बस चालक और परिचालक भरत सिंह व नारायण सिंह ने बताया कि वह कर्णप्रयाग के रहने वाले हैं। बस तो ऋषिकेश में खड़ी कर दी है और पैदल ही घर की ओर निकल पड़े हैं। शुक्रवार तड़के ऋषिकेश से पैदल चले और बृहस्पतिवार को श्रीनगर पहुंच गए हैं। वहीं, कीर्तिनगर के पास सड़क किनारे आराम कर रहे सात मजदूरों ने बताया कि वह देहरादून के हैं। केदारनाथ बर्फ हटाने के काम में लगे थे, लेकिन अब घर जा रहे हैं। रुद्रप्रयाग तक तो वाहन से आए, लेकिन अब पैदल ही देहरादून जा रहे हैं। रास्ते में खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ब्रेड और पानी से ही भूख प्यास मिटा रहे हैं। कोई लिफ्ट भी नहीं दे रहा है।
उधर, टिहरी के तीन युवक वाहन नहीं मिलने के कारण रजाखेत के तीन युवक पैदल ही चंबा पहुंचे। रजाखेत के सुमित, सचिन और अंकित ने बताया कि वह ऋषिकेश होटल में नौकरी करते हैं। लॉकडाउन होने से वाहन नहीं मिले तो वे ऋषिकेश से पैदल ही चल पड़े। रास्ते में एक वाहन ने खाड़ी तक छोड़ा, लेकिन उसके आगे कोई नहीं मिला।
2837 प्रवासी पहुंचे हैं गांव
कोटद्वार। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए मैदानी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। जिला प्रशासन के अनुसार 21 से 24 मार्च तक सात ब्लाकों के 589 ग्राम पंचायतों में अब तक 2837 प्रवासी पहुंचे हैं। बीरोंखाल ब्लॉक में सबसे ज्यादा 610 प्रवासी पहुंचे हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी पौड़ी एमएम खान ने बताया कि द्वारीखाल ब्लाक के 97 गाम पंचायतों में 576, जयहरीखाल ब्लाक के 73 ग्राम पंचायतों में 112, रिखणीखाल ब्लाक के 81 ग्राम पंचायतों में 331, यमकेश्वर ब्लाक के 86 ग्राम पंचायतों में 284 प्रवासी अपने गांव पहुंचे हैं। बीरोंखाल ब्लाक के 97 ग्राम पंचायतों में 610, दुगड्डा ब्लाक के 67 ग्राम पंचायतों में 436 और नैनीडांडा ब्लाक के 88 ग्राम पंचायतों में 488 प्रवासी अपने गांव पहुंचे हैं।
प्रवासियों को किया जाए क्वारंटीन
कोटद्वार। गांव पहुंचे प्रवासियों के स्वास्थ्य परीक्षण नहीं होने के कारण स्थानीय लोग प्रवासियों का विरोध कर रहे हैं। स्थिति यह है कि दिल्ली, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, देहरादून, गाजियाबाद, मेरठ आदि मैदानी क्षेत्र से अपने गांव लौट रहे प्रवासियों से स्थानीय लोग खौफजदा है। कई गांवों में प्रवासियों के मेडिकल जांच को लेकर गांव में दो फाड़ हो रहे हैं, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने मैदानी क्षेत्रों से पहुंच रहे लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करने और उन्हें दो सप्ताह क्वारंटीन सेंटर में रखने की मांग की है।
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