देवस्थानम प्रबंधन विधेयक के विरोध में शनिवार शाम को भटवाड़ी के व्यापारियों एवं तीर्थ पुरोहितों ने भटवाड़ी तहसील मुख्यालय पर मशाल जुलूस निकाला। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विधेयक को निरस्त करने की मांग की।
चार धाम समेत 51 प्राचीन मंदिरों को देवस्थानम प्रबंधन विधेयक के तहत सरकारी नियंत्रण में लेने का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहित बीते सात दिसंबर से कलक्ट्रेट में धरने पर डटे हैं। पूर्व चेतावनी के अनुसार शनिवार को बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित, हक हकूकधारी एवं व्यापारी भटवाड़ी बाजार में एकत्र हुए। यहां हुई सभा को संबोधित करते हुए तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि उनके पूर्व अनादि काल से ही मां गंगा और उनके दर्शनों को आने वाले तीर्थयात्रियों की सेवा करते रहे हैं। उस समय तक गंगोत्री तक पहुंचने की कोई सुविधा तक नहीं होती थी। अब जब सुविधाओं का विस्तार हो गया है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु धामों तक पहुंचने लगे हैं, तब सरकार देवस्थानम प्रबंधन विधेयक की आड़ में इन धामों और प्राचीन मंदिरों का अधिग्रहण करने की साजिश कर रही है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर मौजूद यात्रा कारोबारियों एवं व्यापारियों ने तीर्थ पुरोहितों की मांग को जायज बताते हुए आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने तहसील मुख्यालय पर मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उक्त विधेयक को निरस्त करने की मांग की। इस मौके पर व्यापार मंडल अध्यक्ष अरविंद रतूड़ी, पूर्व प्रधान संजीव नौटियाल, राघवानंद नौटियाल, धनेश सेमवाल, मुकेश सेमवाल, गगन सेमवाल, संजय सेमवाल, विंध्यांचल सेमवाल, सुनील रतूड़ी, जितेंद्र रतूड़ी, कन्हैया नौटियाल, लोकमणि रतूड़ी, विनोद रतूड़ी सहित कई लोग शामिल थे।