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उत्तराखंड का सेब और हिमाचल की हो रही ब्रांडिंग !

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देश में सेब उत्पादन के क्षेत्र में तीसरे स्थान पर होने के बावजूद उत्तराखंड के सेब को नाम और पहचान नहीं मिल पा रही है। स्थिति यह है कि सेब तो उत्तराखंड का है लेकिन ब्रांडिंग पड़ोसी राज्य हिमाचल की हो रही है। यहां ब्लाक भटवाड़ी के पर्यटन ग्राम रैथल से बृहस्पतिवार को सेब की फसल की पहली खेप उद्यान विभाग से समय पर पेटियां नहीं मिल पाने के कारण हिमाचल की पेटियों में मंडी भेजी गईं।
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संपूर्ण राज्य में उत्तरकाशी जिले में सर्वाधिक 21 से 22 हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। इसकी बदौलत सेब उत्पादन में उत्तराखंड देश में जम्मू एवं कश्मीर और हिमाचल के बाद तीसरे स्थान पर है लेकिन उत्पादन के साथ ब्रांडिंग पर ध्यान नहीं दिए जाने से राज्य के साथ यहां के सेब उत्पादक क्षेत्रों को नाम और पहचान नहीं मिल पा रही है। स्थिति यह है कि सेब काश्तकारों को फसल तैयार होने के पेकिंग के लिए उद्यान विभाग से पेटियां नहीं मिल पा रही हैं और उन्हें पड़ोसी अन्य राज्यों की पेटियों में उत्तराखंड का सेब मंडियों को भेजने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला सीमांत ब्लाक भटवाड़ी के पर्यटन ग्राम रैथल का सामने आया है। सेब काश्तकार मोहन कुशवाल ने उद्यान विभाग से दो-तीन बार सेब की पेटियां मांगी थीं, लेकिन नहीं मिल पाई। इस कारण उन्होंने हिमाचल के किन्नौर लेबल की पेटियों में सेब की अर्ली वैराइटी किंगरोट और गाला प्रजाति की तैयार फसल को मंडी भिजवाया। कहा कि यहां की पेटियां होतीं तो राज्य के साथ क्षेत्र का भी प्रचार-प्रसार होता।
काश्तकार ने दो दिन पहले पेटियां की मांग की थी। इस कारण उसकी मांग को पूरा करना संभव नहीं था। इस बार पेटियों के लिए टेंडर देर से होने के कारण पेटियों की भी कुछ कमी है। आपूर्तिकर्ता फर्म एक दिन में छह हजार पेटियां ही उपलब्ध करा पा रही है। - डा. रजनीश सिंह, जिला उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी।
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