यमुनोत्री यात्रा मार्ग से लगे थान गांव में बनाल ठकराल पट्टी के आठ गांवों के ग्रामीण अपने आराध्य जमदग्नि ऋषि के प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार में जुटे हैं। वास्तुविद द्वारा तैयार डिजाइन के अनुरूप करीब डेढ़ करोड़ लागत से बन रहे मंदिर के निर्माण के लिए ग्रामीण स्वयं अंशदान एवं श्रमदान कर रहे हैं।
बनाल ठकराल क्षेत्र के थान, गौल, सुकण, स्यालब, फूलधार, नगाणगांव, मस्सू एवं स्यालना गांव के ग्रामीणों ने मंदिर के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया है। वास्तुविद से इसका डिजाइन तैयार कराकर ग्रामीणों ने पुराने मंदिर को अलग कर इसका पुनर्निर्माण शुरू कर दिया है। मंदिर के पुनर्निर्माण में करीब डेढ़ करोड़ लागत का अनुमान है। इसके लिए आठ गांवों के ग्रामीण स्वयं चंदा एकत्र करने के साथ ही श्रमदान कर रहे हैं। गांवों के पुरुष मंदिर की बुनियाद खोदने आदि कार्य कर रहे हैं, जबकि महिलाएं सड़क से निर्माण स्थल तक पत्थरों के ढुलान में जुटी हैं।
मंदिर की पूजा से जुड़े परिवार के सुमन प्रसाद डिमरी, शांति प्रसाद, गोविंदराम व मंदिर समिति के अध्यक्ष हरदेव सिंह चौहान बताते हैं कि पुराणों के अनुसार यहां भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि और मां रेणुका ने साधना की थी। मंदिर परिसर में वर्षभर फल फूलों से लदा रहने वाला एक वृक्ष है, जिसे कल्प वृक्ष की मान्यता है। इस कल्प वृक्ष के नीचे मन्नत मांगने या मंदिर में रतजगा करने से निसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है। मंदिर में अक्षय पात्र वाली रसोई कुमेरू भंडार भी है।