लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ सरकार ने कठोर रुख अपना लिया है, जिसके तहत जिला प्रशासन को आंदोलनरत कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं सरकार के इस कदम को तानाशाही और अधिकारों का हनन बताते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने आरपार की लड़ाई का एलान किया है।
राज्य कर्मचारी घोषित करने, प्रतिमाह 18 हजार रुपये मानदेय देने, मिनी केंद्रों का उच्चीकरण करने, ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन अवकाश देने सहित अन्य मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लंबे समय से आंदोलन कर रही हैं। सोमवार को कलक्ट्रेट परिसर में क्रमिक अनशन कर रही कार्यकर्ताओं ने इस कदम को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। साथ ही सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों में विजयलक्ष्मी, सरीता पंवार, हेमा, लखणी देवी, संपत्ति देवी, सुनीता भट्ट, कुसुुम नेगी, सुच्ची राणा, मुक्ता रावत, कुसुम महर, सोनू आर्य, भागीरथी राणा, बिंद्रा राणा, रामेश्वरी देवी, उर्मिला, परवीन बेग, संगीता सेमवाल, मधु आदि शामिल रहीं।