महिलाओं ने गोमूत्र से फिनायल और गोबर से उपले किए तैयार
उत्तरकाशी। नगर पालिका क्षेत्र के गोफियारा स्थित गोवर्धन गोलोक धाम में गोवंश को सुरक्षित रखने के साथ ही स्वरोजगार की दिशा में नई पहल की जा रही है। गोशाला में संरक्षित गोवंश से प्राप्त गोमूत्र का उपयोग कर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मिश्रित फिनायल और गोबर से उपले तैयार किए हैं।
रविवार को नगर पालिकाध्यक्ष भूपेंद्र चौहान की पहल पर लक्षेश्वर बाड़ाहाट स्वयं सहायता की महिलाओं की ओर से गोशाला में फिनायल और उपले के सैंपल तैयार किए गए। इनका उद्देश्य गोवंश से प्राप्त उत्पादों का उपयोग बढ़ाते हुए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का कहना है कि यदि इस पहल को आगे बढ़ाने में सहयोग मिला तो गोमूत्र से बने फिनायल और उपलों का बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा सकता है।
इससे एक ओर जहां गोशाला के संचालन में मदद मिलेगी वहीं महिलाओं को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। स्थानीय स्तर पर इस पहल को ग्रामीण आजीविका और स्वच्छता से जोड़कर आगे बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। पालिकाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का यह सराहनीय प्रयास है।
पालिका आने वाले समय में गोशाला में गोवंश के गोबर व मूत्र से अगरबत्ती, धूप, विभूति, कोयला बनाने में महिलाओं की मदद करेगी जिसमें संत समाज का भी सहयोग रहेगा। इस मौके पर सोम आश्रम उजेली के कुट्टी महाराज, द्वारिका प्रसाद नौटियाल, मंगल सिंह चौहान, स्वयं सहायता समूह की अध्यक्षा मधु चौहान, दुर्गा पंवार, सुनैना, रिंकी, विजय चौहान, ओपी सेमवाल, पंकज उनियाल, केदार सिंह, रमेश, राजेंद्र सेमवाल आदि उपस्थित रहे।