मताड़ी तोक में 3.25 हेक्टेयर भूमि पर लगाए ग बांज, देवदार, कचनार के पौधे
नौगांव (उत्तरकाशी)। मताड़ी गांव में जिस सिविल भूमि पर ग्रामीणों ने पहले चरान चुगान के लिए वनीकरण का प्रस्ताव ठुकराया था वही भूमि आज गांव की पहचान बन गई है। यह प्रयास ग्रामीणों और वन विभाग के सहयोग का परिणाम है। मताड़ी तोक में 3.25 हेक्टेयर भूमि पर लगे बांज, देवदार, कचनार जैसे पौधों से भविष्य में काफी फायदा मिलेगा।
वर्ष 2020 में वन प्रभाग ने मातला गांव की बंजर भूमि पर वनीकरण की योजना बनाई। ग्रामीणों ने इसे मवेशियों की चरान चुगान भूमि बताकर प्रस्ताव ठुकराया। वन विभाग ने ग्रामीणों को भविष्य के फायदे समझाकर मनाने में सफलता पाई। फिर मताड़ी तोक में ग्रामीणों की मांग पर फलदार और चारापत्ती के पौधे रोपे गए। वनीकरण भूमि को बंधान घोषित कर एक महिला को चौकीदारी दी गई। महज छह साल में मताड़ी तोक एक लहलहाता छोटा जंगल बन गया है। यह जंगल अब पक्षियों के लिए भी सुरक्षित प्रजनन स्थान बन रहा है।
उप प्रभागीय वनाधिकारी साधु लाल पलियाल ने आज पृथ्वी दिवस पर क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर ग्रामीणों ने वनीकरण से मना किया था वह आज गांव की पर्यावरणीय पहचान है। यह सफलता विभाग और ग्रामीणों के आपसी सहयोग से ही संभव हो पाई है। भविष्य में भी गांव को इस वनीकरण से कई तरह के फायदे मिलेंगे।