उत्तरकाशी। मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना के लिए उजाड़े गए परिवार जल विद्युत निगम के उपेक्षित रवैये का खामियाजा भुगतने को मजबूर हैं। जोशियाड़ा में 11 परिवार अब भी डूब क्षेत्र में हैं, तो 26 किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं।
304 मेगावाट की मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना के जोशियाड़ा बैराज जलाशय को डिजाइन के मुताबिक समुद्र सतह से 1108 मीटर लेबल तक भरा जाना है। इसमें जोशियाड़ा के 44 परिवार डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। इनमें से 15 परिवारों ने अन्यत्र विस्थापित करने की मांग की, जबकि शेष 29 परिवारों ने डूब क्षेत्र वाली जमीन का लेबल ऊंचा कर यहीं बसने पर सहमति जताई थी। निगम ने डूब क्षेत्र में अगस्त 2013 में 33 परिवारों के घर तो तुड़वा दिए, लेकिन अभी तक सिर्फ सात परिवारों को ही जोशियाड़ा कालोनी में भूखंड आवंटित किए हैं। शेष 26 परिवार एक साल से किराए के मकानों में रह रहे हैं, जबकि समुचित मुआवजा नहीं मिलने पर 11 परिवार अब भी डूब क्षेत्र वाले पुराने मकानों में ही डटे हुए हैं।
प्रभावित तीन नवंबर से करेंगे तालाबंदी
डूब क्षेत्र प्रभावित मनोज रांगड़, यशपाल, एएस राणा, विकास कलूड़ा, शूरवीर बिष्ट का कहना है कि निगम प्रभावितों के प्रति उपेक्षित रवैया अपना रहा है। समय बीतने के साथ किराए का बोझ और भवनों की लागत बढ़ती जा रही है। जोशियाड़ा कालोनी में आवंटित जमीन अभी तक प्रभावितों के नाम दर्ज नहीं होने से न तो बैंक से लोन मिल पा रहा है और न ही भवनों का बीमा हो पा रहा है। मांगों पर प्रभावित तीन नवंबर से जोशियाड़ा स्थित निगम कार्यालय पर तालाबंदी करेंगे।
शुरूआत में जोशियाड़ा डूब क्षेत्र में आ रहे 14 परिवारों ने अन्यत्र विस्थापन की इच्छा जताई थी, लेकिन बाढ़ के बाद अधिकांश परिवार विस्थापन के इच्छुक हैं। कुछ परिवारों को तो जोशियाड़ा कालोनी में भूमि आवंटित की जा चुकी है। शेष पर कार्रवाई चल रही है।
शिवदास, ईई जल विद्युत निगम।