फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

करोड़ों खर्च, धरातल पर कार्य शून्य

Mon, 14 Apr 2014 05:31 AM IST
Uttar Kashi
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तरकाशी। सितंबर 2003 में वरुणावत भूस्खलन के बाद वर्ष 2004 में केंद्र सरकार ने जब 282 करोड़ का वरुणावत पैकेज जारी किया था, तो लोगों में विकास की उम्मीद जगी थी। लेकिन दस साल में अधिकांश बजट खर्चने के बाद भी धरातल पर आधे-अधूरे कार्य पड़े हैं। और तो और सरकारी लापरवाही के चलते पांच करोड़ सरेंडर भी करने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन

सितंबर 2003 में वरुणावत पर्वत से हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। दर्जनों बहुमंजिले सरकारी-गैर सरकारी भवन इसकी भेंट चढ़ गए थे। वर्ष 2004 में केंद्र सरकार ने वरुणावत त्रासदी से निपटने के लिए 282.53 करोड़ का पैकेज जारी किया। बजट को खर्च करने के लिए दस साल तक चली कसरत के बावजूद धरातल पर हालात नहीं सुधरे। जमीन संबंधी विवाद के कारण पांच करोड़ का बजट तो सरेंडर करना पड़ा और करीब 82 करोड़ खर्च कर हुए कार्य आधे-अधूरे पड़े होने से उपयोगी नहीं हैं।
पर्याप्त बजट के बावजूद समय पर काम पूरे नहीं होने के पीछे सरकारी महकमों की लापरवाही को जिम्मेदार मानें या फिर जनप्रतिनिधियों की कमजोर इच्छाशक्ति। इस हाल में अब बाढ़ सुरक्षा के नाम पर चल रही 400 करोड़ की वृहद कार्ययोजना की सफलता पर भी संदेह होना स्वाभाविक है।
विज्ञापन


इन कार्यों का बजट हुआ सरेंडर
वरुणावत पैकेज में 1.26 करोड़ में उद्यान विभाग की कालोनी, 2.73 करोड़ में मोरी प्रखंड के कलाप गांव के लिए धौला में झूला पुल तथा 1.61 करोड़ में पालिका उत्तरकाशी का शॉपिंग कांप्लैक्स और आवासीय भवन बनने थे। जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण इसमें से 5.01 करोड़ रुपये सरेंडर कर दिए गए।

ये काम पड़े हैं अधूरे
वरुणावत पैकेज में 13.22 करोड़ लागत से तांबाखानी सुरंग, 2.18 करोड़ का जिला पंचायत का शॉपिंग कांप्लैक्स, 11.08 करोड़ का मोरी-नैटवाड़-सांकरी मोटर मार्ग, 3.32 करोड़ का जिला निर्वाचन कार्यालय एवं एनआईसी भवन तथा 52 करोड़ लागत से बड़ेथी-तेखला वैकल्पिक राजमार्ग का निर्माण अधूरा पड़ा है।

वरुणावत पैकेज के कार्यों के लिए स्वीकृत बजट संबंधित विभागों को आवंटित किया जा चुका है। वरुणावत पैकेज की समय सीमा 31 दिसंबर 2013 को पूरी हो चुकी है। काम पूरा नहीं करने वाले विभागों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बीके मिश्रा, एडीएम उत्तरकाशी।

सरकारों की ओर से करोड़ों का बजट स्वीकृत करने से विकास नहीं होने वाला। धरातल पर इसका समय पर उपयोग भी जरूरी है। वरुणावत पैकेज सिर्फ सरकारी नुमाइंदों एवं ठेकेदारों की ओर से किए गए घोटालों के लिए ही याद रहेगा।
विज्ञापन

बुद्धि सिंह पंवार, संयोजक, लोक सेवक संघ उत्तरकाशी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें