उत्तरकाशी। आपदा आए एक माह बीत गया है, लेकिन अभी तक गंगोत्री घाटी के गांवों में मिट्टी का तेल नहीं पहुंच पाया है। स्थिति यह है कि ग्रामीण लकड़ी के छिलकों तथा राहत सामग्री में मिली मोमबत्ती से अंधियारा दूर कर रहे हैं।
क्षेत्र में 16 और 17 जून की बाढ़ से सड़क व संपर्क मार्ग तबाह होने से गंगा घाटी के दर्जनों गांव अलग-थलग पड़ गए थे। बिजली के तार टूटने से गांवों में आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई है। गंगा घाटी के पिलंग, सिल्ला, सालू, सौरा, लौंथरु, बयाणा, तिहार, भंगेली, भुक्की, जौंडाव गांव तक अभी मिट्टी के तेल नहीं पहुंच पाया है। पिलंग गांव के प्रधान चंदन सिंह और हुकम सिंह बताते है कि अभी तक गांव में कैरोसीन नहीं पहुंच पाया। जौंडाव के विक्रम सिंह व भागवत सिंह भी गांव में मिट्टी तेल नहीं पहुंचने की बात बताते हैं।
विभाग के 15 हजार लीटर का स्टॉक
दूरस्थ गांवों में भले ही अभी तक मिट्टी तेल नहीं पहुंच पाया हो, लेकिन जिले में पूर्ति विभाग के पास 15 से ज्यादा तेल रखा हुआ है। इसमें 2674 गंगोरी, 4721 बडेथी, 3300 नौगांव व 5400 लीटर राजगड्डी में हैं।
गंगा घाटी के दूरस्थ गांवों के लिए हेलीकाप्टर से शनिवार को 750 लीटर कैरोसीन हर्षिल हेलीपैड पर भेज दिया गया था। इसके अलावा भटवाड़ी हेलीपैड़ पर भी 200 लीटर और 400 लीटर तेल भेजा गया है। - केएस बिष्ट, जिला पूर्ति अधिकारी।