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गांव एक, घर अलग-अलग जनपदों में

Wed, 23 Jan 2013 05:31 AM IST
Uttar Kashi
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उत्तरकाशी। सत्ता बदलने से यमनोत्री जिले के गठन के साथ ही टिहरी जिले के आठ गांवों को उत्तरकाशी में मिलाने का प्रस्ताव भी ठंड बस्ते में चला गया है। उत्तरकाशी जिले से सटे इन गांवों की हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चोपडाली गांव के अनुसूचित जाति के लोगों के घर टिहरी में तथा सवर्णों के घर उत्तरकाशी में हैं। इन सभी गांवों की छानियां(गोशालाएं) उत्तरकाशी जिले में पड़ती हैं।
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वर्ष 1960 में टिहरी से अलग उत्तरकाशी जनपद गठन के समय हुए अव्यवहारिक सीमांकन का खामियाजा महेड़ा, दड़माली, कटखेत, बगोन, गोजमेर, बगालचक, कौड़ू छोटा और कौड़ू बड़ा गांव को भुगतना पड़ रहा है। जबकि ये हर लिहाज से उत्तरकाशी के करीब हैं। वर्तमान में इनका जिला मुख्यालय 112 किमी दूर है। जबकि उत्तरकाशी में शामिल होने पर इनकी तहसील से दूरी महज 15 किमी तथा जिला मुख्यालय से 42 किमी रह जाएगी। ब्लाक मुख्यालय, इंटर कालेज, महाविद्यालय, बिजली-पानी के दफ्तर जैसी जनसुविधाएं भी नजदीक उपलब्ध हो सकेंगी। पिछली सरकार द्वारा शुरू हुई पुनर्गठन की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में होने से क्षेत्र के ग्रामीण मायूस हैं।

इनसेट-

वर्ष 2009 में तत्कालीन सीएम डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने यमनोत्री जिले की घोषणा की थी। इस पर कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए मुख्य राजस्व आयुक्त ने पुनर्गठन प्रस्ताव मंगाए थे। तब उत्तरकाशी और टिहरी के जिलाधिकारियों नेइन आठ गांवों को उत्तरकाशी में शामिल करने की जरूरत बताते हुए प्रस्ताव भेजे थे। लेकिन अब तक इन पर कार्रवाई नहीं हुई।
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डा.राजेंद्र प्रसाद जोशी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य कटखेत टिहरी।

वर्ष 1960 में गलत सीमांकन का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। विकास से कोसों दूर इस क्षेत्र के पिछड़ेपन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन गांवों से एक भी व्यक्ति सरकारी नौकरी में नहीं है। अब सरकार को चाहिए कि इन गांवों को उत्तरकाशी में शामिल किया जाए। - मुलमा पंवार, क्षेत्र पंचायत सदस्य कटखेत टिहरी।
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