उत्तरकाशी। पुलिस ने शनिवार को तिलोथ पुल के पास नौ छात्रों को सोल्यूशन सूंघ कर नशा करते हुए पकड़ा। हालांकि मामला शहर के प्रतिष्ठित एक गैर सरकारी स्कूल से जुड़ा होने से उनके अभिभावकों को हिदायत देकर छोड़ा गया। इस घटना के बाद से छात्रों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर बहस तेज हो गई है।
स्कूली बच्चों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर लंबे समय से चर्चाओं का बाजार गर्म था। व्हाइटनर पर प्रतिबंध के बाद नशेड़ियों ने इसके विकल्प तलाश लिए हैं। एकांत स्थानों पर स्कूली बच्चे सोल्यूशन, नेलपालिश, बूटपालिश सूंघ कर नशा करते देखे जा रहे हैं। कैमिस्ट की दुकानों पर आयोडेक्स, मूव तथा बिना डाक्टरी परामर्श के बेचे जा रहे एल्कोहल वाले सिरप और नींद की गोलियां भी बड़े पैमाने पर नशे के तौर पर इस्तेमाल हो रही हैं।
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सोल्यूशन, नेलपालिश, बूट पालिश में एसीटोन होता है। जिसे सूंघने पर व्यक्ति को नशा होता है। इससे धीरे-धीरे नींद आती है तथा हृदय गति कम हो जाती है। इसका असर एल्कोहल की तरह ही होता है। ज्यादा लेने पर मौत का भी खतरा है।- डा.अश्विनी कुमार चौबे, सर्जन जिला अस्पताल।
नगर के एकांत क्षेत्रों में बच्चों के इस तरह का नशा करने की शिकायतें मिल रही हैं। पुलिस ने शनिवार को तिलोथ पुल के पास एक स्कूल के नौ बच्चों को सोल्यूशन सूंघ कर नशा करते हुए पकड़ा। उनके अभिभावकों को हिदायत देकर छोड़ा गया। जल्द ही इसके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।- भाष्कर थपलियाल, प्रभारी थानाध्यक्ष कोतवाली