चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)। हाल ही में गठित नगर पंचायत चिन्यालीसौड़ का मामला कोर्ट कचहरी के चक्कर में उलझता नजर आ रहा है। जिला प्रशासन ने जहां वार्डों का निर्धारण कर आपत्तियां मांगी हैं। वहीं क्षेत्र के कुछ जनप्रतिनिधियों ने नगर पंचायत के मानक ही पूरे न होने की बात कहते हुए इसे निरस्त करने की मांग को लेकर न्यायालय में वाद दर्ज कराया है।
अंतरक्षेत्रीय पलायन के कारण बढ़ती आबादी के चलते गंगोत्री राजमार्ग पर चिन्यालीसौड़ कस्बे का रूप ले चुका है। यहां सभी व्यवस्थाएं अब भी गांवों के ढर्रे पर ही चल रही हैं। ऐसे में जनता की मांग पर हाल ही में इसे नगर पंचायत का दर्जा दे दिया गया। इसमें चिन्यालीसौड़, बड़ेथी, धनपुर, चुपल्या, श्यामपुर, धरासू मूल गांवों को शामिल किया गया है। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने यहां सात वार्ड निर्धारित कर एक हफ्ते के भीतर आपत्तियां मांगी हैं।
प्रशासन के इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए चिन्यालीसौड़ गांव से क्षेत्र पंचायत सदस्य ब्लाक प्रमुख बलवीर बिष्ट, लीला रावत, पुरुषोत्तम, कमलदास आदि पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि मूल गांवों को नगर पंचायत में शामिल कर इसकी जनसंख्या 10 हजार से अधिक बतायी जा रही है जबकि इसमें आधे से ज्यादा अंतरक्षेत्रीय पलायन वाले लोग हैं। साथ ही यहां 90 फीसदी भूभाग कृषि की भूमि है और ग्रामीणों की आजीविका का आधार खेती ही है। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
कोर्ट में वाद की नहीं है जानकारी
चिन्यालीसौड़। डीएम डा.आर.राजेश कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार वार्डों का निर्धारण कर आपत्तियां मांगी गई हैं। इस बारे में जनप्रतिनिधियों द्वारा हाईकोर्ट में वाद दायर किए जाने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।