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लोक परंपरा के अनुसार हो संसाधनों का संरक्षण

Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
Uttar Kashi
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पुरोला(उत्तरकाशी)। जल, जंगल, जमीन के स्वामित्व तथा प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण लोक परंपरा के अनुसार करने की मांग को लेकर स्वराज अभियान यात्रा पुरोला पहुंची। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को भविष्य के लिए बड़ा खतरा बताया।
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महिला समाख्या के सौजन्य से आयोजित बैठक में स्वराज अभियान के वक्ताओं ने कहा कि सरकारी नीतियों से जल, जंगल, जमीन का स्वामित्व स्थानीय लोगों से छिनता जा रहा है। प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। इनका संरक्षण लोक परंपरा के अनुसार किया जाना चाहिए। कहा कि एक दशक में देश की कुल कृषि भूमि का 15 प्रतिशत 1.80 करोड़ हेक्टेयर खेती से बाहर हो गया है। उत्तराखंड में ही राज्य बनने के बाद 25 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि उद्योगों के लिए अधिग्रहीत की जा चुकी है।
बड़े पैमाने पर खेती की जमीन एक्सप्रेसवे, खनन, विशेष आर्थिक क्षेत्र, बिजली परियोजना, औद्योगिक कारीडोर और शहरीकरण के उपयोग में लग रही है। इससे छोटे तथा मझोले किसान भूमिहीन होते जा रहे हैं। यह भविष्य के लिए खतरे का संकेत है। इस मौके पर सर्वोदयी नेता सुरेश भाई, राधा बहन, अमरनाथ भाई, रवि प्रकाश शुक्ल, अशोक भारत, देवेंद्र बहुगुणा, डा.सच्चिदानंद आदि ने विचार व्यक्त किए। देहरादून से शुरू हुई यह यात्रा उत्तराखंड, हिमाचल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होते हुए दो दिसंबर को राजघाट दिल्ली में संपन्न होगी।
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