उत्तरकाशी। गंगोत्री में निर्माण पर लगे प्रतिबंध को ठेंगा दिखा कर धड़ल्ले से भवनों का निर्माण जारी है। स्थिति यही रही तो इस तीर्थ धाम में तीर्थाटन को बढ़ावा देने की भारत सरकार की निर्मल गंगा मेगा प्रोजेक्ट के उद्देश्यों पर खरा उतरने पर सवालिया निशान लग सकता है।
प्रदेश सरकार ने गंगोत्री में भवनों के निर्माण को प्रतिबंधित कर रखा है। जीर्णशीर्ण भवनों के मूल स्वरूप में छेड़छाड़ किए बिना कुछ सुधार की अनुमति की व्यवस्था जरूर है। यहां बस अड्डे से गंगोत्री मंदिर की ओर जाने वाले संकरे रास्ते के किनारे धड़ल्ले से भवन निर्माण चल रहा है। जबकि कार्यदायी संस्था चयनित करके 50 करोड़ के निर्मल गंगा मेगा प्रोजेक्ट में कार्य शुरू हो चुका है। इसमें प्रमुख सचिव पर्यटन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यहां कुछ पीछे हट कर 200 दुकानें बनाई जाए ताकि यात्रियों को आने जाने में सुविधा रहे तथा आधा किमी दूर से मंदिर भी दिखाई दे। फिलवक्त गंगोत्री मंदिर का ओर दुकानों से संकरा हो चुका है। मंदिर भी अतिक्रमण से ऐसा ढक गया है कि दूर से दिखाई नहीं देता है। गंगोत्री विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण तथा गंगोत्री नगर पंचायत के अस्तित्व में होने के बावजूद बिना स्टाफ के यहां अवैध निर्माण कार्यों पर अंकुश न लगा पाने से मेगा प्रोजेक्ट की सफलता संदेहास्पद बताई जा रही है।
कोट-
बिना पुलिस, वन विभाग तथा प्रशासन की मदद से गंगोत्री में अवैध निर्माण रोकना मुश्किल है। अभी गुजराती आश्रम द्वारा अतिक्रमण करके कराए जा रहे निर्माण सहित तीन अन्य का चालान किया। गंगोत्री में निर्माण पर शासन से प्रतिबंध लगा है।- जितेंद्र कुड़ियाल इंजीनियर गंगोत्री विशेष क्षेत्र प्राधिकरण
50 करोड़ के निर्मल गंगा मेगा प्रोजेक्ट का काम शुरू हो चुका है। हर्षिल, धराली लंका, भैरोघाटी से लेकर गंगोत्री तक इसमें यात्री सुविधाओं का विकास किया जाना है। इसके क्रियान्वयन में आने वाली अड़चन को दूर करते समय स्थानीय लोगों के हितों को भी ध्यान में रखा जाएगा। - खुशहाल सिंह नेगी, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारीa