पदोन्नति नहीं होने से शिक्षकों ने जताई नाराजगी
विद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था हो रही है प्रभावित
उत्तरकाशी। राजकीय विद्यालयों में छात्रसंख्या घटने के पीछे प्रधानाध्यापकों और प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों के साथ शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य कराना भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों के 1385 पदों में से करीब 90 प्रतिशत वर्षों से रिक्त हैं। वहीं, हाईस्कूलों में भी अधिकांश प्रधानाध्यापकों के पद खाली पड़े हैं। इससे विद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष अतोल सिंह महर ने कहा कि प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के अधिकांश पद पदोन्नति से भरे जाने हैं। लेकिन लंबे समय से पदोन्नति प्रक्रिया ठप है। स्थिति यह है कि कई शिक्षक 35 से 36 साल तक एक ही पद पर सेवाएं देने के बाद बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्थायी प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य नहीं होने से शिक्षकों को बिना अतिरिक्त मानदेय के प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ रही हैं। इसके चलते उनके विषयों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। इसका खामियाजा छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। वर्ष 2010-12 से न्यायालय में मामले विचाराधीन होने के बावजूद 2020-21 तक पदोन्नतियां होती रहीं। ऐसे में वर्ष 2021 के बाद पदोन्नति नहीं होने के लिए केवल न्यायालयी मामलों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।