नौगांव (उत्तरकाशी)। बर्नी सिंचाई नहर पर पानी नहीं चलने के कारण धारी कलोगी क्षेत्र के किसानों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। स्रोत पर पर्याप्त पानी होने के बावजूद सिंचाई नहर का हेड क्षतिग्रस्त होने से खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर इसे दुरुस्त करने की कोशिश की, लेकिन नहर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण उन्हें सफलता नहीं मिली।
बर्नी तोक में सिंचित कृषि भूमि है। इस जमीन पर धान के साथ ही टमाटर, मटर, फ्रैंचबीन, शिमला मिर्च आदि नकदी फसलें उगाकर किसान अपनी आजीविका चलाते हैं। बर्नी तोक में खेतों की सिंचाई के लिए सिलाई सेरा स्रोत से तीन किमी लंबी सिंचाई नहर बनी है। विगत वर्षों में इस सिंचाई नहर से पर्याप्त पानी मिलने पर किसानों ने खेतों से अच्छा उत्पादन किया, लेकिन नहर का हेड तीन साल से क्षतिग्रस्त पड़ा है। इससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
बीते दो साल से ग्रामीण स्वयं श्रमदान कर हेड को कामचलाऊ ढंग से दुरुस्त कर किसी तरह खेतों तक पानी ले जा रहे थे। इस बार भी ग्रामीणों ने दो दिन तक श्रमदान कर कहीं तिरपाल बिछाकर तो कहीं दीवार लगाकर नहर दुरुस्त करने का प्रयास किया, लेकिन नहर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाया, जिससे अब किसान धान की नर्सरी तैयार नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही सब्जी फसलों की सिंचाई के लिए भी पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों की आजीविका खतरे में पड़ गई है। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग से शीघ्र नहर दुरुस्त कर खेतों तक पानी पहुंचाने की मांग की है।
धारी कलोगी क्षेत्र के सुरेशानंद, पीतांबर डोभाल, बालक राम, सियाराम, अरविंद, जयपाल सिंह, जबर सिंह ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग नहर की मरम्मत के नाम पर हर साल बजट खर्च करता है।
बर्नी सिंचाई नहर का हेड क्षतिग्रस्त हो रखा है। इसका प्राक्कलन शासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही यहां कार्य कराया जाएगा। फिलहाल काश्तकारों की सुविधा के लिए दो-तीन दिन में पाइप बिछाकर खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
बीएस रावत, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग डामटा।