उत्तरकाशी। नगर पालिका बाड़ाहाट की कूड़े की समस्या को लेकर पालिका एवं जिला प्रशासन का लापरवाह रवैया हैरान करने वाला है। हाईकोर्ट के आदेश को छह माह पूरे होने को है, लेकिन अभी तक कूड़ा निस्तारण के लिए जमीन ही नहीं तलाशी जा सकी है। पालिका ने जिला मुख्यालय पर तांबाखानी सुरंग के बाहरी हिस्से में गंगा भागीरथी के किनारे गंगोत्री हाईवे को ही कचरा डंपिंग जोन बना डाला है।
दशकों तक पालिका नगर का कूड़ा गंगा भागीरथी में मिलने वाले तेखला गदेरे में उड़ेलती रही। बीते साल एक नवंबर को हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाने के आदेश दिए। तब से अभी तक पालिका प्रशासन कूड़ा निस्तारण के लिए कोई जगह नहीं तलाश पाया है। प्रशासन ने पहले कंसैण गांव के निकट जमीन उपलब्ध कराई, लेकिन ग्रामीणों के विरोध और हाईकोर्ट के स्टे के बाद पालिका प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। इसके बाद पालिका ने मांडों गांव के निकट गंगा भागीरथी के किनारे लीज पर जमीन लेकर यहां वैज्ञानिक ढंग से कूड़ा निस्तारण के लिए किल वेस्ट मशीन भी लगा दी थी, लेकिन यहां भी ग्रामीणों के विरोध और हाईकोर्ट के स्टे के बाद मामला अधर में लटक गया।
अब हाल यह है कि पालिका द्वारा नगर का सारा कूड़ा तांबाखानी सुरंग के बाहरी हिस्से में गंगोत्री हाईवे पर डंप किया जा रहा है। ऐसे में बाहरी हिस्से से पैदल आवाजाही भी बंद हो गई है। यूं तो पालिका ने कूड़े को गंगा भागीरथी में जाने से रोकने के लिए घेरबाड़ की है, लेकिन बारिश के साथ इस कचरे से निकलने वाला गंदा पानी गंगा में पहुंच रहा है। अब गर्मी और बरसात के सीजन में यह सभी समस्याएं बढ़नी तय है।
कचरा निस्तारण करना पालिका की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए जमीन प्रशासन को मुहैया करानी है। हाईकोर्ट ने सरकार को 27 अप्रैल तक पालिका को जमीन उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक प्रशासन ने कहीं जमीन नहीं दिलवाई। तांबाखानी के निकट सिर्फ व्यवस्था के तहत कूड़ा जमा किया जा रहा है।
रमेश सेमवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका बाड़ाहाट उत्तरकाशी।
एनजीटी के मानकों के अनुरूप कचरा निस्तारण के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। शासन को वन भूमि हस्तांतरण और मानकों में शिथिलीकरण का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
डा.आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।