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चुनाव से रह सकती चारधाम यात्रा फीकी

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उत्तरकाशी। आगामी सात मई से आरंभ हो रही चारधाम यात्रा में इस वर्ष लोकसभा चुनावों का असर पड़ सकता है। आंकड़ों के अनुसार बीते चुनावी वर्षों में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ में पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में इस बार भी अंतिम चरणों के मतदान और 23 मई को होने वाली मतगणना के चलते तीर्थयात्रियों की संख्या घट सकती है।
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चारधाम यात्रा में हर वर्ष मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, यूपी, पंजाब आदि राज्यों के हजारों तीर्थयात्री पहुंचते हैं। लोकसभा चुनावों के दौरान इन यात्रियों की संख्या में गिरावट आ जाती है। बीते सालों के आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2003 में चारधाम यात्रा में कुल 11 लाख 72 हजार 566 यात्री पहुंचे थे, लेकिन वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह संख्या घटकर 11 लाख 58 हजार 986 रह गई थी। वहीं 2008 में 21 लाख 06 हजार 704 तीर्थयात्रियों के मुकाबले वर्ष 2009 में महज 20 लाख 23 हजार 986 यात्री ही पहुंचे थे। वर्ष 2013 में 12 लाख 54 हजार 541 का आंकड़ा छूने के बाद वर्ष 2014 में भी यात्रियों की संख्या 3 लाख 17 हजार 900 तक सिमट गई थी। हालांकि 2014 में आई गिरावट के पीछे चुनावों से अधिक आपदा का प्रभाव रहा, लेकिन इससे पहले के वर्षों में आई गिरावट चुनावों के प्रभाव को स्पष्ट दर्शाती है। ऐसे में इस बार चारों धामों के कपाट खुलने के बाद भी 12 व 19 मई को देश के कई बड़े राज्यों में अंतिम दो चरणों के मतदान होंगे, जबकि 23 को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। चारधाम यात्रा में सबसे ज्यादा भीड़ शुरूआती दो माह में ही उमड़ती है। जुलाई में मानसून की दस्तक के साथ यात्रा धीमी पड़ जाती है।
बीते सालों के आंकड़ों को देखते हुए इस चुनावी वर्ष में भी तीर्थयात्रियों की संख्या में गिरावट आ सकती है। हालांकि सभी धामों के कपाट खुलने तक गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, केरल आदि राज्यों में मतदान पूर्ण हो जाएंगे।
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बागेश्वर उनियाल, प्रवक्ता, यमुनोत्री मंदिर समिति।
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