उत्तरकाशी। पहले आपदा की मार और फिर सरकारी तंत्र की उपेक्षा का शिकार हुए चामकोट गांव के ग्रामीणों को उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग ने कुछ राहत दी है। खस्ताहाल ट्रॉली और अस्थायी पुल के सहारे आवाजाही कर रहे ग्रामीणों की समस्या का स्वत: संज्ञान लेते हुए आयोग ने जिला प्रशासन को नोटिस भेजकर 11 अप्रैल तक जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
जिला मुख्यालय से महज आठ किमी दूर स्थित चामकोट गांव के पैदल रास्ते व मोटर मार्ग, वर्ष 2012-13 की आपदा में क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे गंगोत्री हाईवे व गंगा भागीरथी के दूसरी छोर में बसे ग्रामीणों के लिए आवाजाही का कोई साधन नहीं बचा था। इसका संज्ञान लेते हुए सरकार ने आवाजाही के लिए नदी के ऊपर मानव चलित ट्रॉली लगाने के साथ ही झूला पुल निर्माण को स्वीकृति दी, लेकिन आपदा के छह वर्ष बाद भी नहीं बना। इससे ग्रामीण आज तक जर्जर ट्रॉली से आवाजाही करने को मजबूर है। हालांकि इस संबंध में समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने के बाद अब उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग के जस्टिस अखिलेश चंद्र शर्मा ने समस्या का स्वत: संज्ञान लिया है। साथ ही जिला प्रशासन को नोटिस भेजकर झूला पुल निर्माण में हो रही देरी पर आगामी चार अप्रैल तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। चामकोट के जयकृष्ण चमोली, ओम प्रकाश भट्ट, भजन दास, देवेंद्र सेमवाल, रामसेवक चमोली ने कहा कि जिला मुख्यालय के निकट होने के बावजूद प्रशासन ने कभी चामकोट गांव की समस्या का संज्ञान नहीं लिया।
उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग ने चामकोट गांव के प्रस्तावित झूला पुल के निर्माण को लेकर जवाब मांगा है, जिस पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने लोनिवि के अधिकारियों को इस संबंध में त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
देवेंद्र नेगी, उपजिलाधिकारी भटवाड़ी।