चिन्यालीसौड़। देश के सबसे बड़े आतंकी हमले में शहीद मोहन लाल रतूड़ी का अंतिम संस्कार करने के बाद शनिवार देर शाम को उनकी पत्नी सरिता देवी अपने पांचों बच्चों व अन्य परिजनों के साथ बनकोट गांव पहुंची, जहां उनके पैतृक घर में रविवार सुबह से ही शहीद की आत्मा की शांति के लिए पूजा पाठ आदि क्रियाकर्म शुरू किए गए। इस दौरान गांव के लोग परिवार को सांत्वना देने एवं शहीद की तेेरहवीं आदि क्रियाकर्म में सहयोग देने के लिए उनके घर पहुंचे।
इस बीच राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा, गंगोत्री विधायक गोपाल रावत आदि जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने शहीद के गांव पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी। साथ ही शासन प्रशासन की तरफ से परिवार को हर संभव मदद एवं सहयोग प्रदान करने का भरोसा दिया। गंगोत्री विधायक ने कहा कि शहीद के परिवार को शासन प्रशासन की तरफ से हर संभव सहयोग व मदद मुहैया कराई जाएगी। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष रमेश सेमवाल, पूर्व गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण, पूर्व कपकोट विधायक ललित फर्सवाण, पूर्व पालिकाध्यक्ष शूरवीर रांगड़, रामसुंदर नौटियाल, दिनेश खत्री सहित डीएम डा. आशीष चौहान, एसपी पंकज भट्ट आदि मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने की शहीद स्मारक बनाने की मांग
बनकोट गांव के ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से शहीद मोहन लाल रतूड़ी के सम्मान में गांव के चौराहे पर स्मारक बनाने की मांग की है। जोगेंद्र रावत, सुंदरलाल रतूड़ी ने सरकार से स्मारक बनाने के साथ ही बनकोट मोटर मार्ग व राइंका दिचली का नाम शहीद के नामपर रखने की अपील की है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण से क्षतिग्रस्त हुए शहीद के घर का मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत की, जिस पर डीएम डा. आशीष चौहान ने पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को 24 घंटों के भीतर इस्टीमेट तैयार कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल्द ही परिवार को मुआवजा देने का भरोसा दिया।
सरकार से जवाबी कार्रवाई करने की मांग
शहीद की बड़े भाई लक्ष्मी प्रसाद रतूड़ी, छोटे भाई मनमोहन रतूड़ी ने आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की मांग की। शहीद की पत्नी सरिता देवी ने कहा कि उनके पति सेवानिवृत्त होकर गांव में ही खेतीबाड़ी व पंडिताई करने की योजना बना रहे थे, लेकिन आतंकवादियों ने उनके सभी सपने चकनाचूर करके परिवार को बेसहारा कर दिया। उन्होंने सरकार से अपने पति व अन्य शहीदों की शहादत का बदला लेने की मांग की। वहीं शहीद के बच्चों शंकर, वैष्णवी, गंगा, राममूर्ती व अनसूया ने अपने पिता की शहादत पर गर्व जाहिर करते हुए उनकी तरह राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया।