बड़कोट। लंबे इंतजार के बाद इस वर्ष मां यमुना खरसाली में अपने स्वयं के मंदिर में शीतकालीन प्रवास करेंगी। करीब एक दशक तक चले निर्माण कार्य के बाद खरसाली गांव में करीब 50 लाख रुपये लागत से मां यमुना का भव्य मंदिर तैयार किया गया है। भैयादूज पर्व पर यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की उत्सव मूर्ति को मंदिर में पहली बार स्थापित किया जाएगा।
मां यमुना के शीतकालीन पड़ाव खरसाली गांव में अभी तक मां यमुना का मंदिर नहीं था, जिससे प्रत्येक वर्ष यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की मूर्ति को गांव में स्थित राजराजेश्वरी देवी के मंदिर में ही रखा जाता था। श्रद्धालुओं व ग्रामीणों की मांग पर पंच पंडा समिति ने खरसाली में यमुनोत्री के प्रतिकृति मंदिर का निर्माण शुरू किया, लेकिन बजट के अभाव के चलते मंदिर को बनने में एक दशक से ज्यादा समय लग गया। पंच पंडा समिति के अध्यक्ष वेदप्रकाश उनियाल व सचिव विकास उनियाल ने बताया कि करीब 50 लाख रुपये लागत से मां यमुना का भव्य मंदिर तैयार हो गया है। इस वर्ष यमुनोत्री मंदिर के कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की उत्सव मूर्ति को शीतकालीन प्रवास के दौरान नवनिर्मित मंदिर में रखा जाएगा। मां यमुना के स्वागत के लिए इस नवनिर्मित मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। इस विशेष अवसर के लिए मंदिर में रात्रि जागरण तथा सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा।
आज बंद होंगे यमुनोत्री मंदिर के कपाट
बड़कोट। चारधाम यात्रा के प्रथम तीर्थ यमुनोत्री मंदिर के कपाट शुक्रवार (आज) दोपहर 12.15 बजे बंद हो जाएंगे। मंदिर समिति के सचिव कृतेश्वर उनियाल व उपाध्यक्ष जगमोहन उनियाल ने बताया कि सुबह 9 बजे मां यमुना के चचेरे भाई शनि देव (समेश्वर देवता) की डोली खरसाली गांव से यमुनोत्री धाम के लिए रवाना होगी, जहां यमुनोत्री धाम में विशेष पूजा अर्चना कर दोपहर 12.15 बजे मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे। इसके बाद मां यमुना व शनि देव की डोलियों को भव्य शोभायात्रा के साथ खरसाली गांव लाया जाएगा, जहां नवनिर्मित मंदिर में मां यमुना की उत्सव मूर्ति को स्थापित किया जाएगा। शीतकाल के अगले छह माह तक श्रद्धालु इसी मंदिर में मां यमुना के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर सकेंगे।