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पीएम को अपने बीच पाकर छलका जाड भोटिया समुदाय के ग्रामीणों का दशकों पुराना दर्द

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उत्तरकाशी। हर्षिल के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला, तो बगोरी के ग्रामीणों का दशकों पुराना दर्द छलक उठा। भारत-चीन युद्ध के दौरान वर्ष 1962 में अपने मूल गांव नेलांग और जाढ़ूंग से बेदखल किए गए ग्रामीणों ने पीएम से समुचित मुआवजा देने या फिर उन्हें फिर से अपने गांवों में बसाने की मांग की। उन्होंने सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों ने पीएम को ऊन की शॉल व टोपी भेंट की।
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बीते मंगलवार को सेना प्रमुख और बुधवार को पीएम मोदी के कार्यक्रम को देखते हुए सेना ने हर्षिल क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया था। बुधवार सुबह पौने आठ बजे जैसे ही पीएम मोदी सेना के हेलीकॉप्टर से उतरकर पैदल सेना के हर्षिल कैंप की ओर बढ़े, तो उनकी नजर दूर खड़े जाड भोटिया समुदाय के लोगों पर पड़ी। पीएम ने ग्रामीणों को अपने पास बुलाया तो उनके चेहरे खिल उठे। पीएम ने ग्रामीणों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए मिठाई बांटी।
बगोरी के प्रधान भवान सिंह राणा ने पीएम को बताया कि वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान सेना की जरूरत को देखते हुए जाढ़ूंग एवं नेलांग गांव खाली कराया गया था, लेकिन ग्रामीणों को मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने पीएम से पुन: इन गांवों को आबाद कर ग्रामीणों को वहीं बसाने की मांग की। साथ ही ग्रामीणों ने जसपुर से बगोरी, हर्षिल, मुखबा होते हुए जांगला तक ऑल वेदर रोड निर्माण, हर्षिल एवं बगोरी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने व गांव में आवासीय केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग की। इस मौके पर किशन सिंह, महेंद्र सिंह, मोहन सिंह, श्रीराम प्रसाद, कलावती देवी, सुलोचना देवी आदि मौजूद रहे।
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