उत्तरकाशी। आजकल राइंका कमद के छात्र-छात्राएं स्कूल में बम बनाने में जुटे हैं। उन्होंने करीब दस हजार बम तैयार कर लिए हैं, जिन्हें वे गांधी जयंती पर अपने गांव व आसपास के जंगलों में बरसाएंगे। घबराने की बात नहीं, ये बच्चे विध्वंस नहीं सृजन के लिए ‘बीज बम’ तैयार कर रहे हैं।
हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान जाड़ी ने अब ‘बम बरसावा, हरियाली ल्यावा’ अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मुहिम शुरू की है। इसके तहत डुंडा के राइंका कमद में छात्र-छात्राओं द्वारा बीज बम तैयार किए जा रहे हैं। दो अक्तूबर को गांधी जयंती पर स्कूली बच्चे और ग्रामीण अपने गांव के आसपास एवं जंगलों में इन बीज बमों की बरसात करेंगे। जाड़ी संस्था के सचिव द्वारिका सेमवाल ने बताया कि बीज बम तकनीक का विदेशों में सफल प्रयोग हो चुका है। उन्होंने बताया कि शुरूआती दौर में अभी कद्दू, राई, सरसों, बांस एवं शहतूत के बीज बम बनाए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ जंगल पनपाए जा सकते हैं, बल्कि जंगलों में ही शाकाहारी वन्य जीवों की आहार श्रृंखला तैयार कर गांवों में वन्य जीवों को आबादी में आने से रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि बीज बम तैयार करने में राइंका कमद के प्रधानाचार्य लालजी कन्नौजिया, बचन सिंह, गंगा बहुगुणा, आरती, रजनी, अंजू, अंबिका, लक्ष्मी, उपेंद्र, दुर्गेश आदि ने विशेष सहयोग दिया।
ऐसे बनाया जाता है बीज बम
मिट्टी, गोबर और पानी को मिलाकर छोटे-छोटे गोले बनाए जाते हैं और गोले के बीच में बीज डाल दिया जाता है। यह बीज क्षेत्र विशेष के अनुकूल होने चाहिए। गोले को खुले में फेंकने पर वातावरण से नमी मिलने पर गोले में दबा बीज अंकुरित होकर वहीं जमीन में जड़ें जमा लेता है और धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से पनप जाता है। पौधरोपण के मुकाबले वनीकरण की यह तकनीक बेहद सस्ती, आसान एवं कम समय लेने वाली है और दुर्गम क्षेत्रों में भी कारगर है।