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मवेशियों के साथ छानियों में फंसे 40 परिवार

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उत्तरकाशी। असी गंगा घाटी में घट्टूगाड़ में बना पुल बहने के कारण मोरापड़ा, मोरसुना, सिल्याण छानियों में अगोड़ा एवं दंदालका गांव के 40 परिवार डेढ़ सौ से अधिक मवेशियों के साथ फंसे हुए हैं। प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सुध नहीं लिए जाने पर अब ग्रामीण स्वयं ही असी गंगा पर अस्थायी पुलिया बनाने की तैयारी में जुटे हैं। इसके लिए उन्हें अभी असी गंगा में पानी कम होने का इंतजार है।
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वर्ष 2012 में असी गंगा में आयी बाढ़ में घट्टूगाड़ में बना जिला पंचायत का पुल बह गया था, जिससे अगोड़ा और दंदालका गांव की मोरापड़ा, मोरसुना एवं सिल्याण की छानियां अलग-थलग पड़ गई थीं। साथ ही अगोड़ा से दयारा बुग्याल का ट्रैक भी अवरुद्ध हो गया था। आपदा को छह साल बीतने पर भी यहां पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। प्रशासन ने यहां एक ट्राली लगाकर इतिश्री कर ली। जर्जर हुई ट्राली से आवाजाही खासी जोखिम भरी है। इस हाल में ग्रामीण हर साल यहां लकड़ी से अस्थायी पुलिया का निर्माण कर छानियों तक आवाजाही की व्यवस्था करते हैं, लेकिन यह व्यवस्था भी बरसात में असी गंगा में पानी बढ़ने पर धराशायी हो जाती है।
इस साल भी अप्रैल-मई में क्षेत्र के ग्रामीण अपने मवेशियों के साथ छानियों में गए थे। जुलाई में असी गंगा में आए उफान में अस्थायी पुलिया बह गई। ऐसे में दो माह से अगोड़ा और दंदालका गांव के 40 परिवार अपने डेढ़ सौ से अधिक मवेशियों के साथ छानियों में ही फंसे हुए हैं। गांव से छानियों तक ट्राली के सहारे जरूरी सामान की आपूर्ति तो किसी तरह चल रही है, लेकिन मवेशियों को वापस गांव पहुंचाने का रास्ता नहीं है। अब ठंड बढ़ने पर ग्रामीणों को अपने मवेशियों की चिंता सताने लगी है। अगोड़ा के सुरेश, शिबूलाल, चंद्री देवी, दंदालका के चैत सिंह, देवेंद्री देवी, बीना देवी, रामचंद्री आदि का कहना है कि अब असी गंगा में पानी कम होने पर दोनों गांवों के ग्रामीण मिलकर घट्टूगाड़ में अस्थायी पुलिया का निर्माण करेंगे।
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कोट...........
घट्टूगाड़ में बाढ़ में बहा पुल जिला पंचायत का था। इसके पुनर्निर्माण का प्रस्ताव कहां लंबित है, इसका पता करवाकर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अस्थायी पुलिया बना कर ग्रामीणों और उनके मवेशियों को सुरक्षित गांव पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
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देवेंद्र नेगी, एसडीएम भटवाड़ी।
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