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सेब किसानों की उम्मीद के अनुरूप नहीं हुई बारिश बर्फबारी

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गढ़वाल। पहाड़ों में सोमवार को हुई बारिश से निचले इलाकों में भले ही जंगलों में सुलगी आग बुझ गई हो, लेकिन सेब की फसल के लिए यह पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन में नमी कम होने के कारण बारिश की मात्रा ज्यादा नहीं होने से यह गेहूं, सरसों आदि की फसलों के लिए तो ठीक है, लेकिन सेब के लिए खास नहीं है।

सेब की फसल के लिए नहीं हुई पर्याप्त बर्फबारी
जमीन में नहीं है पर्याप्त नमी, ग्लेशियरों के लिए भी नहीं है ज्यादा लाभकारी
अमर उजाला ब्यूरो
उत्तरकाशी/पौड़ी। इस बार सर्दियों में मौसम की बेरुखी खेती बागवानी के साथ ही जंगलों की सेहत और प्राकृतिक जलस्रोतों पर भी भारी पड़ रही है। सोमवार को हुई हल्की बारिश और बर्फबारी से भी खेती बागवानी को ज्यादा फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। जमीन में पर्याप्त नमी का अभाव आने वाली गर्मियों में दावानल के लिहाज से चिंताजनक माना जा रहा है। गंगा भागीरथी के जलागम क्षेत्र में अपेक्षित बर्फबारी नहीं होने का सीधा असर ग्लेशियरों की सेहत पर पड़ना तय माना जा रहा है।
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इन सर्दियों में दिसंबर से अभी तक जिले में महज तीन बार ही हल्की बारिश और बर्फबारी हुई है। जिले में तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले हिस्सों में बर्फ की हल्की चादर बिछी तो है, लेकिन मौसम खुलने पर इसका तुरंत पिघलना तय है। जिले में उपला टकनौर, नौगांव स्योरी फलपट्टी और मोरी क्षेत्र के अधिकांश सेब बागान दो से ढाई हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। यहां सेब के बागीचे बर्फ विहीन पड़े हैं। ऐसे में सेब पेड़ों की न्यूनतम अवशीतन आवश्यकता पूरी नहीं होने से उत्पादन प्रभावित होना तय है। सुक्की के सेब किसान मोहन सिंह राणा, धराली के संजय पंवार ने बताया कि इस बार बर्फ नहीं होने से सेब पर टिकी आजीविका चौपट होती दिख रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के सेब विशेषज्ञ डा. पंकज नौटियाल के अनुसार अपेक्षित बर्फबारी नहीं होने से इस बार फ्लावरिंग जल्दी होने के कारण फ्रूट सेटिंग में दिक्कत आएगी।
खेती बागवानी के साथ ही मौसम की यह बेरुखी जंगलों की सेहत और प्राकृतिक जलस्रोतों पर भी भारी पड़ेगी। बारिश और बर्फबारी में कमी के कारण जमीन सूखी पड़ी है। ऐसे में गर्मियों में तापमान बढ़ने पर जंगलों की आग को नियंत्रित करना मुश्किल होगा। भूजल स्रोत रिचार्ज नहीं होने का असर गर्मियों में पेयजल किल्लत के रूप में सामने आने की आशंका है। अपेक्षित बर्फबारी का अभाव ग्लेशियरों की सेहत के लिए भी खतरा माना जा रहा है। रवाईं क्षेत्र के स्योरी फल पट्टी में पर्याप्त बारिश व बर्फबारी नहीं होने से सेब के पेड़ों पर केंकर रोग गया था, जिससे वे सूख रहे हैं। सोमवार को हुई बारिश से काश्तकारों को फसल के रोग से छुटकार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कम बारिश व बर्फबारी ने उनके उम्मीद पर पानी फेर दिया है।
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उधर, पौड़ी में हुई झमाझम बारिश से रबी की फसलों को काफी फायदा होगा। मुख्य कृषि अधिकारी पौड़ी डा. डीएस राणा ने कहा कि निचले इलाकों में हुई बारिश रबी के फसल के लिए खुराक का काम करेगी।
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